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Shimla News: शहर के खलीनी फ्लाईओवर के टेंडर तीसरी बार रद्द
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अब चौथी बार बुलाए टेंडर, फ्लाईओवर के बनने से खलीनी और टॉलैंड में लगने वाले जाम से मिलनी हैै राहत
चार साल से चल रही है निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। स्मार्ट सिटी योजना में शामिल खलीनी फ्लाईओवर जिसे 2024 तक बनकर तैयार होना था आज भी कागजों में ही सिमटा है। अब तीसरी बार फ्लाईओवर के टेंडर रद्द हो गए हैं। शुरू से ही लापरवाही और योजनागत कमियों के चलते यह महत्वपूर्ण परियोजना अधर में लटकी है।
अब चौथी बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की है जिसके लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 9 मई रखी है। इस फ्लाईओवर के बनने से खलीनी चौक समेत बीसीएस, टुटीकंडी, पंथाघाटी और टॉलैंड में लगने वाले यातायात जाम से राहत मिलेगी। 17.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना का पहली बार टेंडर 2021 में हुआ था और 19.5 करोड़ की लागत रखी थी। इसका निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया था और परियोजना के तहत 2 करोड़ की लागत से खलीनी जंक्शन को चौड़ा किया था लेकिन परियोजना के डिजाइन में ख्रामियां पाई गईं थीं। इसके बाद परियोजना को रद्द कर दिया था। इसके बाद 2023 में दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई। केवल एक ठेकेदार के बोली में आने के कारण इस टेंडर को अमान्य घोषित करना पड़ा। इसके बाद तीसरी टेंडर जारी किया गया। हरिबल सिंह एंड सन्स कंपनी को काम आवंटित कर दिया लेकिन केंद्रीय लोक निर्माण विभाग चंडीगढ़ से निर्माण की स्वीकृति नहीं मिली। मंजूरी न मिलने से काम अटक गया और टेंडर रद्द हो गया है। तकनीकी औपचारिकताएं पूरी न होने और प्रशासनिक मंजूरी के अभाव में यह प्रक्रिया फिर अधूरी रह गई। लगातार तीन प्रयासों में नाकामी यह दिखाती है कि इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
फ्लाईओवर का महत्व
खलीनी फ्लाईओवर समय पर बन गया होता तो शहर के प्रमुख इलाकों में जाम की समस्या काफी हद तक सुलझ जाती। रोजाना हजारों वाहन ख्रलीनी चौक पर जाम में फंसते हैं, जिससे समय और ईंधन की बर्बादी के साथ पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शिमला को एक आधुनिक और सुगम शहर बनाने का सपना भी इस देरी से अधूरा पड़ा है। फ्लाईओवर का प्रस्तावित डिजाइन 5.8 मीटर चौड़ा और 210 मीटर लंबा सिंगल लेन स्ट्रक्चर था। आधुनिक स्टील पाइल्स तकनीक अपनाकर इसे तेज गति से तैयार करना तय हुआ था। लेकिन जब मंजूरी नहीं मिली तो सारी तकनीकी योजनाएं फाइलों में दबकर रह गईं।
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चार साल से चल रही है निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। स्मार्ट सिटी योजना में शामिल खलीनी फ्लाईओवर जिसे 2024 तक बनकर तैयार होना था आज भी कागजों में ही सिमटा है। अब तीसरी बार फ्लाईओवर के टेंडर रद्द हो गए हैं। शुरू से ही लापरवाही और योजनागत कमियों के चलते यह महत्वपूर्ण परियोजना अधर में लटकी है।
अब चौथी बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की है जिसके लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 9 मई रखी है। इस फ्लाईओवर के बनने से खलीनी चौक समेत बीसीएस, टुटीकंडी, पंथाघाटी और टॉलैंड में लगने वाले यातायात जाम से राहत मिलेगी। 17.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना का पहली बार टेंडर 2021 में हुआ था और 19.5 करोड़ की लागत रखी थी। इसका निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया था और परियोजना के तहत 2 करोड़ की लागत से खलीनी जंक्शन को चौड़ा किया था लेकिन परियोजना के डिजाइन में ख्रामियां पाई गईं थीं। इसके बाद परियोजना को रद्द कर दिया था। इसके बाद 2023 में दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई। केवल एक ठेकेदार के बोली में आने के कारण इस टेंडर को अमान्य घोषित करना पड़ा। इसके बाद तीसरी टेंडर जारी किया गया। हरिबल सिंह एंड सन्स कंपनी को काम आवंटित कर दिया लेकिन केंद्रीय लोक निर्माण विभाग चंडीगढ़ से निर्माण की स्वीकृति नहीं मिली। मंजूरी न मिलने से काम अटक गया और टेंडर रद्द हो गया है। तकनीकी औपचारिकताएं पूरी न होने और प्रशासनिक मंजूरी के अभाव में यह प्रक्रिया फिर अधूरी रह गई। लगातार तीन प्रयासों में नाकामी यह दिखाती है कि इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
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फ्लाईओवर का महत्व
खलीनी फ्लाईओवर समय पर बन गया होता तो शहर के प्रमुख इलाकों में जाम की समस्या काफी हद तक सुलझ जाती। रोजाना हजारों वाहन ख्रलीनी चौक पर जाम में फंसते हैं, जिससे समय और ईंधन की बर्बादी के साथ पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शिमला को एक आधुनिक और सुगम शहर बनाने का सपना भी इस देरी से अधूरा पड़ा है। फ्लाईओवर का प्रस्तावित डिजाइन 5.8 मीटर चौड़ा और 210 मीटर लंबा सिंगल लेन स्ट्रक्चर था। आधुनिक स्टील पाइल्स तकनीक अपनाकर इसे तेज गति से तैयार करना तय हुआ था। लेकिन जब मंजूरी नहीं मिली तो सारी तकनीकी योजनाएं फाइलों में दबकर रह गईं।
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