भूरे भालुओं की गणना को हिमाचल समेत इन देशों के विशेषज्ञों ने चंबा में जमाया डेरा
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विलुप्त हो रहे भूरे भालुओं की प्रजाति के चंबा जिला में दिखने के बाद अब इनकी गणना की कवायद शुरू हो गई है। फ्रांस, जर्मनी और चंबा के विशेषज्ञों ने भूरे भालुओं की संख्या का पता लगाने के लिए कुगति के सेंक्चुरी एरिया में डेरा जमा लिया है।
विशेषज्ञ फिकल मेटर से भूरे भालुओं के डीएनए की स्टडी करेंगे। भूरे भालुओं के फिकल मेटर का स्लोविनिया स्थित प्रयोगशाला में विश्लेषण किया जाएगा। विशेषज्ञों की यह टीम एक वर्ष तक गणना के लिए कार्य करेगी।
बहरहाल, स्लोविनिया स्थित प्रयोगशाला से अक्तूबर तक परिणाम आने के बाद विशेषज्ञ वन रक्षकों सहित अन्य वन कर्मियों को फिकल मेटर को एकत्रित करने संबंधी प्रशिक्षण देंगे।
गौरतलब है कि जनजातीय क्षेत्र पांगी के सेचू नाला सहित कुगति में विलुप्त भूरे भालू को देखा गया है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर और कुल्लू के ऊंचे इलाकों में भी भूरे भालू देखे गए हैं। यह प्राणी 4000 मीटर से ऊंचे क्षेत्रों में पाया जाता है।
ऐसे में अब कुगति के सेंक्चुरी एरिया में भूरे भालुओं की गणना के लिए योजना बनी है। इंटरनेशनल बीयर एसोसिएशन की ओर से भूरे भालुओं की गणना का पायलट प्रोजेक्ट आरंभ किया गया है।
विशेषज्ञों में जर्मनी से डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. तृष्णा शर्मा, फ्रांस से डीएनए विशेषज्ञ डॉ. मार्टा और चंबा से डॉ. विपिन राठौर इस टीम में शामिल हैं। डॉ. विपिन राठौर ने बताया कि भूरे भालुओं की गणना के लिए इंटरनेशनल बीयर एसोसिएशन ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल में काम करना शुरू कर दिया है।
कुगति परिक्षेत्र में भूरे भालू के फिकल मेटर एकत्रित कर शोध के लिए स्लोविनिया भेजे जाएंगे। शोध परिणाम भूरे भालुओं की गणना में सहायक सिद्ध होंगे। इस विधि का इस्तेमाल अन्य विलुप्त हो रहे जानवरों की गणना में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
कुगति सेंक्चुरी एरिया में विशेषज्ञों की टीम भूरे भालुओं के फिकल मेटर पर शोध कर उनकी गणना कर रही है। इसका सार्थक परिणाम मिलने की संभावना है।
- निशांत मंढोत्रा, डीएफओ चंबा