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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Supreme Court gives green signal to Shimla Development Plan

Shimla Development Plan: शिमला विकास योजना को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, ग्रीन एरिया में घर बना सकेंगे लोग

Thu, 11 Jan 2024 08:54 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Krishan Singh Updated Thu, 11 Jan 2024 08:54 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश सरकार 20 जून 2023 को प्रकाशित विकास योजना पर आगे बढ़ सकती है।

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Supreme Court gives green signal to Shimla Development Plan
शिमला शहर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 22450 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित शिमला विकास योजना 2041 को लागू करने की अनुमति दे दी। इसमें पारिस्थितिक तंत्र को लेकर कायम चिंताओं के साथ संतुलित ढंग से विकास की जरूरत पर जोर दिया है। योजना लागू होने पर कुछ शर्तों के साथ 17 ग्रीन बेल्ट में निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। योजना का उद्देश्य शहर में निर्माण गतिविधियों को विनियमित करना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश सरकार 20 जून 2023 को प्रकाशित विकास योजना पर आगे बढ़ सकती है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के पिछले आदेशों को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि राज्य सरकार और उसकी अथॉरिटी को किसी विशिष्ट तरीके से विकास योजना बनाने का निर्देश देना न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

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पीठ ने कहा कि जो क्षेत्र विशेष रूप से कार्यपालिका या विधायिका के क्षेत्र में है, उसके संबंध में कार्यपालिका को निर्देश या सलाह देना न तो कानूनी होगा और न ही उचित होगा। कार्यपालिका, विधायिका या अधीनस्थ विधायिका को सौंपे कार्यों को हड़पने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। पीठ ने अपने आदेश में कहा, हमने विकास योजना देखी है। विभिन्न विशेषज्ञ समितियों की रिपोर्टों और पर्यावरणीय और पारिस्थितिक पहलू समेत विभिन्न पहलुओं के संबंध में किए अध्ययनों पर विचार करने के बाद विकास योजना को अंतिम रूप दिया है। पीठ ने कहा है, हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस विकास योजना के सूक्ष्म विवरण पर विचार नहीं किया है। लेकिन प्रथम दृष्टया देखने पर हमारा मानना हैं पर्यावरण और पारिस्थितिक चिंताओं की देखभाल और समाधान करते हुए संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए हैं।
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विशेषज्ञों की राय लेकर बनाई पूरी योजना
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि विकास योजना को शहरी नियोजन, पर्यावरण आदि समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की राय के बाद अंतिम रूप दिया है। इस बात की भी अनदेखी नहीं कर सकते कि विकास योजना को आपत्तियां आमंत्रित करने और अन्य सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अंतिम रूप दिया है। ऐसे में योजना को रोका नहीं जा सकता।
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किसी को आपत्ति है तो दे सकते हैं चुनौती
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी नागरिक को यह शिकायत है कि कोई प्रावधान पर्यावरण या पारिस्थितिकी के लिए हानिकारक है तो वह उसे चुनौती देने के लिए स्वतंत्र है। इसके साथ ही कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार की अपील स्वीकारते हुए एनजीटी द्वारा इस मामले में वर्ष 2017 के बाद पारित किए गए आदेशों को दरकिनार कर दिया।


एनजीटी ने जारी किए थे कई निर्देश
एनजीटी ने इस मामले में 2017 के बाद से कई निर्देश जारी किए थे जिसमें कहा था कि शिमला योजना क्षेत्र के भीतर प्रमुख, गैर-प्रमुख, हरित और ग्रामीण क्षेत्रों में अनियोजित और अंधाधुंध विकास ने पर्यावरण और पारिस्थितिकी से संबंधित गंभीर चिंताओं को जन्म दिया है। पीठ ने यह भी कहा कि न्यायिक औचित्य के आधार पर एनजीटी को हाईकोर्ट के मामले के संज्ञान में आने के बाद कार्यवाही जारी नहीं रखनी चाहिए थी और विशेष रूप से जब उसे सूचित किया था कि हाईकोर्ट ने मामले को अपने पास ले लिया है।

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