बंद करो पहाड़ पर चरस की खेती: सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को अफीम व अन्य प्रतिबंधित पदार्थों के उत्पादन पर रोक लगाने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने पाया कि प्रदेश में प्रतिबंधित पदार्थों के उत्पादन से न केवल वहां बल्कि आसपास के राज्यों पर भी असर पर रहा है। युवा वर्ग भ्रमित हो रहा है।
न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने हिमाचल प्रदेश में प्रतिबंधित पदार्थों के हो रहे उत्पादन पर नाराजगी जताते हुए पहाड़ों पर होने वाली प्रतिबंधित पदार्थों की होने वाली खेती पर रोक लगाने के लिए कहा।
चरस के साथ पकड़े गए हरियाणा के दो युवकों की सजा को कम करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार से कहा कि इन लोगों को पकड़ने से क्या होगा। पहले उन लोगों को पकड़ना चाहिए जो इस तरह के नशे का उत्पादन कर रहे हैं।
जानिए क्या था पूरा मामला
पीठ ने कहा कि पहले रोग की पहचान करनी चाहिए न कि रोगियों के इलाज पर पूरा ध्यान देना चाहिए। पीठ ने पाया कि वास्तव में नशे के बढ़ते कारोबार की जड़ उसका उत्पादन करना है। लिहाजा इसके उत्पादन पर ही रोक लगनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने 28 जनवरी 2013 को बाइक पर सवार दो युवक राकेश कुमार और सिया राम को 885 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया था। राकेश बाइक चला रहा था जबकि सिया राम पीछे बैठा था। सिया राम के बैग से चरस बरामद हुआ था।
राकेश और सिया राम दोनों हरियाणा के कैथल जिले के रहने वाले थे। ट्रायल कोर्ट ने दोनों को आठ साल कैद की सजा सुनाई थी। साथ ही दोनों पर 80-80 हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया था। हाईकोर्ट ने भी उनकी दोषसिद्धि को सही ठहराया था। हाईकोर्ट ने सिया राम की सजा आठ साल से घटाकर पांच साल कर दी थी लेकिन राकेश की आठ वर्ष की कैद को बहाल रखा था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की सजा तीन-तीन वर्ष कर दी। अदालत ने पाया कि दोनों युवक हैं और वे तो महज कैरियर हैं।