राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल के गठन का फैसला रद्द
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हिमाचल सरकार अब स्टेट इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (एसआईएसएफ) का गठन नहीं करेगी। 2010 में पूर्व भाजपा सरकार के समय कैबिनेट ने फैसला लिया था कि राज्य में स्थापित उद्योगों को सुरक्षा देने के लिए सीआईएसएफ की तर्ज पर एसआईएसएफ बनाई जाए।
हालांकि फैसला होने के बाद पूर्व सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में इस बारे में कोई कदम नहीं उठाया गया। अब इस फैसले को वापस लिया जा रहा है। गृह विभाग ने इस बारे में एक कैबिनेट मैमोरेंडम तैयार कर लिया है।
इसे राज्य मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में रखा जाएगा। प्रस्ताव में लगाए गए आर्डर में कहा गया है कि चूंकि इस फैसले को वापस लिए बिना औद्योगिक सुरक्षा की किसी वैकल्पिक योजना पर काम नहीं किया जा सकता, इसलिए इसे वापस लिया जाए। अब अंतिम फैसला कैबिनेट की बैठक में होगा।
प्रदेश में 6000 से अधिक उद्योग
2010 में राज्य सरकार ने जब अलग से सुरक्षा बल के गठन का फैसला लिया, तब हिमाचल पुलिस ने करीब 659 जवान विभिन्न विभागों और संस्थाओं को सुरक्षा ड्यूटी के लिए दे रखे थे। इसके अलावा आईआरबी फर्स्ट बटालियन जुन्गा के शेष 300 जवानों को भी इसमें डालने की योजना थी, ताकि करीब 1000 जवान इस फोर्स में हों। लेकिन कई तकनीकी वजहों से योजना सिरे नहीं चढ़ पाई।
सूत्र बताते हैं कि पूर्व सरकार के समय ही धर्मशाला में हुई समीक्षा बैठक में भी इस फैसले के रोल बैक की पृष्ठभूमि बन गई थी। इसके बाद पूर्व डीजीपी बी. कमल कुमार के समय औद्योगिक सुरक्षा के लिए नये प्रारूप पर काम शुरू हुआ। राज्य में इस समय 6000 से ज्यादा मध्यम एवं बड़े उद्योग हैं। इनकी सुरक्षा के लिए कोई अलग फोर्स राज्य में नहीं है।