हिमाचल में भवन निर्माण के लिए नई गाइडलाइन
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हिमाचल में अब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तभी भवनों का नक्शा पास करेगा अगर संबंधित फाइल में इंजीनियर का स्टेबिलिटी प्रमाण होगा। हिमाचल प्रदेश हाई रिस्कजोन में आता है। प्रदेश को आपदा से बचाने के लिए सरकार ने यह व्यवस्था की है। इसके अलावा टीसीपी ने लोगों को इंजीनियरों की मदद से भवन निर्माण करने की सलाह दी है।
टीसीपी की मानें तो हिमाचल में जमीन एक जैसी नहीं है। कोई रेतली, कहीं चट्टान और कहीं पर भूस्खलन वाली जमीन है। प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्र में चट्टानें ज्यादा हैं जबकि मैदानी इलाकों में जमीन के नीचे पत्थर के बजाए ज्यादा मिट्टी होती है।
हिमाचल में कई स्थानों पर रेतली जमीन भी है। ऐसे में सभी क्षेत्रों में एक जैसे भवनों का निर्माण नहीं किया जा सकता है। इसीलिए सरकार ने मकान बनाने के लिए इंजीनियर का स्टेबिलिटी प्रमाण पत्र नक्शे में लगाना अनिवार्य किया है।
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने बताया कि हिमाचल में भूकंप रोधी मकान बनाने की पहल की जा रही है। नक्शा पास कराने के लिए इंजीनियरों का स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट जरूरी किया है।
हिमाचल में आपदा प्रबंधन बटालियन खोलने को भेजा प्रस्ताव
आपदा प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा ने कहा कि सभी जिलों में आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में आपदा प्रबंधन बटालियन खोलने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा चुका है।
इसके लिए राज्य सरकार की ओर से भूमि चिह्नित की गई है। सभी उपायुक्तों को भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। राजेंद्र राणा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन के लिए प्रत्येक जिले में होमगार्ड के तीस-तीस जवानों को ट्रेंड किया है।
स्कूलों में एनएसएस, एनसीसी कैडेट्स को भी आपदा प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है। स्कूलों में मॉक ड्रिल करवाकर आपदा से निपटने के गुर सिखाए जा रहे हैं।