सीएम के निशाने पर आए सुक्खू से खास इंटरव्यू, 5 तीखे सवाल
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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू की कार्यशैली पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कई सवाल खड़े किए हैं। इससे पार्टी के भीतर हड़कंप मच गया है। सीएम ने इतना तक कह दिया है कि सुक्खू उन्हें हाईकमान से शिकायत को मजबूर कर रहे हैं।
सीएम की तल्खी के बाद पंडित सुखराम, बृज बिहारी लाल बुटेल, विप्लव ठाकुर जैसे कुछ नेता सुक्खू के बचाव में भी आए हैं। अमर उजाला ने कांग्र्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू से पांच तीखे सवाल किए, जिनके जवाब उन्होंने इस तरह से दिए -
सवाल : आप पार्टी को तानाशाहपूर्ण तरीके से चलाने का प्रयास कर रहे हैं और कांग्र्रेस के सबसे कद्दावर नेता सीएम वीरभद्र सिंह तक को विश्वास में नहीं ले रहे हैं?
जवाब : साढ़े तीन साल हो गए मुझे अध्यक्ष बने हुए। मुख्यमंत्री, मंत्रियों का इतने समय से समर्थन ही तो रहा है। सबने इस दौरान विश्वास ही तो जताया है। सचिवों की नियुक्ति का मामला तिल से ताड़ बन गया है। सीएम साहब ने कुछ बातें की हैं। ये उनसे मिलकर सुलझा ली जाएंगी।
सवाल : आपने संगठनात्मक जिले बनाकर हिमाचल में प्रशासनिक जिलों को बनाने को हवा नहीं दी क्या और क्या यह भाजपा की नकल नहीं है?
जवाब : भाजपा की मंशा कुछ और थी, कांग्रेस ने ऐसा केवल पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए किया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं से ही ऐसी मांग उठ रही थी। जब मैं कांगड़ा और मंडी में शुरू में जनसभाओं में गया तो मुश्किल से 400-500 लोग जुटते थे। हमने नए संगठनात्मक जिले बनने के बाद सुंदरनगर मंडी में सभा करके शुरू में ही 2000 लोगों को जुटाया। नूरपुर कांगड़ा में करीब 4000, देहरा कांगड़ा में करीब 3000 और पालमपुर कांगड़ा में भी 2000 कार्यकर्ताओं को जुटाया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक जिलों की मांग कभी नहीं की और न ही करेंगे।
इन सवालों पर ये बोले सुक्खू
सवाल : आपने प्रदेश कांग्र्रेस कमेटी और इससे संबद्ध इकाइयों में पदाधिकारियों की अंधाधुंध नियुक्तियां कर ली हैं। इससे पार्टी का खर्च नहीं बढ़ा क्या?
जवाब : हमने जिन लोगों को पार्टी संगठन में जोड़ा है। वे सब समर्पित पदाधिकारी हैं। वे टीए तक नहीं लेते हैं। उल्टा जेब से पैसा खर्च करके पार्टी की सेवा में लगे हैं। सरकार में सुनवाई हुई या नहीं, मगर वे पार्टी संगठन में सम्मान मिलने से बहुत संतुष्ट हैं। इससे तो पार्टी को ही मजबूत किया है। हमने एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के पूर्व पदाधिकारियों को पार्टी में जगह देने का प्रयास किया है। बोर्डों-निगमों के कई अध्यक्षों-उपाध्यक्षों को भी ऐसा करना चाहिए।
सवाल : कांग्रेस घोषणापत्र में भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस की बात की गई है। सीएम वीरभद्र सिंह खुद कई मामलों से जूझ रहे हैं। आपने कभी इस मसले पर बात नहीं की?
जवाब : आरोपों को लगाए जाने से कोई भ्रष्टाचार का दोषी नहीं हो जाता। सीएम साहब के साथ भी यही बात है। उन पर महज आरोप लगे हैं। ऐसे आरोप प्राय: निराधार ही होते हैं। बाकी राजीव गांधी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कानून बनाया। सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में तो यूपीए सरकार ने आरटीआई जैसा कानून लाया। कांग्रेस ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ बात की है।
सवाल : क्या यह सही है कि पार्टी के ही कुछ नेताओं ने आपको हटवाने के लिए अभियान चलाया है और अध्यक्ष बने रहना आपकी बड़ी चिंता बनी हुई है?
जवाब : प्रदेश में दो कुर्सियां ऐसी हैं, जिन पर बहुतों की नजरें गड़ी हुई हैं। एक कुर्सी सीएम की है और एक कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की। इन दोनों कुर्सियों के कई चाहवान हैं। उन्होंने अगर अभियान चलाए हैं तो ये स्वाभाविक भी हैं। कुछ लोगों की नजरें सीएम की कुर्सी पर टिकी हुई हैं तो कुछ की मेरी कुर्सी पर। ऐसे लोग अपने मंसूबों में लगे हैं और हमें अपना काम करना है।