एचएएस अफसरों को वीरभद्र सरकार ने दिया बड़ा तोहफा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रशासनिक सेवा (एचएएस) के अधिकारियों को 3000 रुपये की विशेष वेतन बढ़ोतरी देने का एलान किया है। काडर के विशेष सचिव स्तर के अफसरों को सरकार वाहन भी देगी। शिमला में शनिवार देर शाम को एचएएस अधिकारियों के वार्षिक सम्मेलन में सीएम ने कहा कि वे एचएएस अधिकारियों के साथ एक लंबे अरसे से कार्य करते आ रहे हैं।
ये अधिकारी सदा कसौटी पर खरे उतरे हैं। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावी और कुशलता से सेवाएं प्रदान करने का आह्वान किया। सीएम ने कहा कि ये अधिकारी सरकार का चेहरा हैं, इसलिए उन्हें इस प्रकार कार्य करना चाहिए जिससे सरकार की छवि श्रेष्ठ बनी रहे। राज्य सरकार ने हमेशा बेहतर कार्य परिस्थितियां और अनुकूल वातावरण देने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने एचएएस अफसरों की अन्य मांगों पर भी विचार करने का आश्वासन दिया। इससे पूर्व संघ के अध्यक्ष मनमोहन शर्मा और महासचिव राम कुमार गौतम ने एचएएस अफसरों की विभिन्न मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत करवाया। इस अवसर पर राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष हर्ष महाजन, मुख्य सचिव वीसी फारका, अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण श्रीधर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सैकड़ों जेल कर्मचारियों को मिलेगा राशन, धुलाई भत्ता
पुलिस कर्मचारियों की तर्ज पर हिमाचल सरकार सूबे की जेलों में कार्यरत सैकड़ों कर्मियों को भी राशन और धुलाई भत्ता देगी। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के दो केंद्रीय कारागारों और दो जिला कारागारों समेत कुल चौदह जेलों में कांट्रेक्ट पर कार्यरत करीब पांच सौ वार्डरों को फायदा मिलेगा।
अभी तक दोनों ही तरह के भत्ते पुलिस कर्मचारियों को मिलते थे लेकिन कारागार कर्मचारी इससे महरूम थे। प्रधान सचिव गृह की ओर से अंडर सेक्रेट्री योगेश सूद ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। शासन की ओर से जारी आदेश के तहत अब जेलों में कार्यरत कांट्रेक्चुअल वार्डरों को राशन भत्ते के रूप में डेढ़ सौ रुपये और धुलाई भत्ते के रूप में तीस रुपये प्रति माह मिलेंगे।
वित्त विभाग पहले ही इस फैसले पर अपनी मंजूरी दे चुका है। डीजी जेल सोमेश गोयल ने बताया कि लंबे समय से जेल कर्मचारी इन भत्तों की मांग कर रहे थे। उन्होंने कुछ समय पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई जेल रिव्यू की बैठक में यह मामला उठाया था। सीएम ने संबंधित विभागों को भत्ते देने के निर्देश जारी किए थे।