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Shimla News: राजधानी में ग्रीन के साथ बिक रहे देवी के चित्रों वाले पटाखे
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व्यापार मंडल का फैसला शहर में बेअसर
शहर के अलावा उपनगरों में भी बेरोकटोक बिक रहे पटाखेे
कारोबारी बाेले, पहले ही खरीद लिया स्टॉक, अब बेचना पड़ेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। देवी-देवताओं की तस्वीरों वाले पटाखे न बेचने का प्रदेश व्यापार मंडल का फैसला राजधानी में ही लागू नहीं हो पाया।
शहर के बाजारों में शुक्रवार को तकरीबन सभी पटाखों के स्टॉल पर देवी-देवताओं की तस्वीरों वाले पटाखे सजाए गए। आइस स्केटिंग रिंक में लगे स्टॉलों में भी देवी के चित्रों वाले पटाखे बेचे गए। उपनगरों में भी कई कारोबारियों ने इन पटाखों की बिक्री की। प्रदेश व्यापार मंडल ने ऐसे पटाखों की बिक्री न करने का फैसला लिया था। साथ ही इसमें केस तक दर्ज करने को कहा था लेकिन शहर के अलावा उपनगरों में लगे स्टालों में बेरोकटोक इन पटाखों की ब्रिकी हो रही है। हालांकि, शहर में पटाखे बेचने वाले कारोबारियों का कहना है कि उन्होंने पहले ही इनका स्टॉक खरीद रखा है। अब इसे बेचना पड़ेगा। बिक्री पर तभी रोक लगेगी जब इससे बनाना बंद करेंगे।
जिला प्रशासन ने आदेश पारित करते हुए दिवाली उत्सव के दौरान ग्रीन पटाखे जलाने की ही अनुमति दी है। उपायुक्त आदित्य नेगी ने किसी भी उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई के अलावा पर्यावरण अधिनियम के तहत तत्काल कार्रवाई अमल में लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आदेश की अनुपालना करने के लिए पुलिस अधीक्षक और जिले के सभी उपमंडल मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए हैं। बताया कि कोई दुकानदार ग्रीन पटाखे के अलावा दूसरे पटाखे बेचते पकड़ा गया तो कार्रवाई करें।
पटाखे जलाने का समय रात 8 बजे तक निर्धारित किया है। प्रशासन का दावा है कि शहर में सिर्फ ग्रीन पटाखें ही बिक रहे हैं। लक्कड़ बाजार में करीब 18 स्टॉल लगाए है। इन पटाखों की कीमत 10 रुपये से साढ़े 6 हजार रुपये तक है। कारोबारी दिव्य प्रकाश और अनूप ने बताया कि दिवाली पर पहली बार एंटी पॉल्यूशन पटाखे बाजार में आए हैं। ग्रीन पटाखों की सत्यता जांचने के लिए स्कैन कर सकते हैं।
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पटाखों की कीमतों में अंतर
वैरायटी ग्रीन पटाखे लालपटाखे
अनार 100-650 120-1000
चक्री 60-350 100- 450
फुलझड़ी 30-350 80-400
राकेट 100-350 120-450
स्काई शॉट 250-6500 300-1500
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दीक्षा शर्मा ने कहा कि पारंपरिक पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखे कम हानिकारक होते हैं और वायु प्रदूषण को कम करते हैं। ग्रीन पटाखों से चिंगारियों निकलेंगी ज्यादा प्रदूषण नहीं होगा।
अमित शर्मा ने कहा कि पर्यावरण को कम करने के लिए ग्रीन पटाखे सबसे अच्छे रहते हैं, और न ही इससे कोई जानलेवा हानि होती है।
अरूणाभ ने कहा कि सामान्य पटाखे जलाने से हर दीवाली पर जलने के मामले बढ़ जाते हैं, लेकिन इस बार ग्रीन पटाखों के कारण इन मामलों में सुधार देखने को मिला सकता है।
प्रदीप शर्मा ने कहा कि ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं, लेकिन इनसे प्रदूषण कम होता है। जो पर्यावरण के लिए लाभदायक है।
नवनीत ने कहा कि ग्रीन पटाखे जलाना एक नई सोच को दर्शाता है। मैं तो खुद भी यही खरीदूंगा और अपने दोस्तों को भी खरीदने के लिए कहूंगा।
अक्षय वर्मा ने कहा कि हर दीवाली पर छोटे बच्चे पटाखे चलाने के लिए उत्साहित रहते हैं, लेकिन जलने के डर से उन्हें चलाने नहीं देते। ग्रीन पटाखों को बच्चें भी जला सकते हैं।
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शहर के अलावा उपनगरों में भी बेरोकटोक बिक रहे पटाखेे
कारोबारी बाेले, पहले ही खरीद लिया स्टॉक, अब बेचना पड़ेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। देवी-देवताओं की तस्वीरों वाले पटाखे न बेचने का प्रदेश व्यापार मंडल का फैसला राजधानी में ही लागू नहीं हो पाया।
शहर के बाजारों में शुक्रवार को तकरीबन सभी पटाखों के स्टॉल पर देवी-देवताओं की तस्वीरों वाले पटाखे सजाए गए। आइस स्केटिंग रिंक में लगे स्टॉलों में भी देवी के चित्रों वाले पटाखे बेचे गए। उपनगरों में भी कई कारोबारियों ने इन पटाखों की बिक्री की। प्रदेश व्यापार मंडल ने ऐसे पटाखों की बिक्री न करने का फैसला लिया था। साथ ही इसमें केस तक दर्ज करने को कहा था लेकिन शहर के अलावा उपनगरों में लगे स्टालों में बेरोकटोक इन पटाखों की ब्रिकी हो रही है। हालांकि, शहर में पटाखे बेचने वाले कारोबारियों का कहना है कि उन्होंने पहले ही इनका स्टॉक खरीद रखा है। अब इसे बेचना पड़ेगा। बिक्री पर तभी रोक लगेगी जब इससे बनाना बंद करेंगे।
जिला प्रशासन ने आदेश पारित करते हुए दिवाली उत्सव के दौरान ग्रीन पटाखे जलाने की ही अनुमति दी है। उपायुक्त आदित्य नेगी ने किसी भी उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई के अलावा पर्यावरण अधिनियम के तहत तत्काल कार्रवाई अमल में लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आदेश की अनुपालना करने के लिए पुलिस अधीक्षक और जिले के सभी उपमंडल मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए हैं। बताया कि कोई दुकानदार ग्रीन पटाखे के अलावा दूसरे पटाखे बेचते पकड़ा गया तो कार्रवाई करें।
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पटाखे जलाने का समय रात 8 बजे तक निर्धारित किया है। प्रशासन का दावा है कि शहर में सिर्फ ग्रीन पटाखें ही बिक रहे हैं। लक्कड़ बाजार में करीब 18 स्टॉल लगाए है। इन पटाखों की कीमत 10 रुपये से साढ़े 6 हजार रुपये तक है। कारोबारी दिव्य प्रकाश और अनूप ने बताया कि दिवाली पर पहली बार एंटी पॉल्यूशन पटाखे बाजार में आए हैं। ग्रीन पटाखों की सत्यता जांचने के लिए स्कैन कर सकते हैं।
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पटाखों की कीमतों में अंतर
वैरायटी ग्रीन पटाखे लालपटाखे
अनार 100-650 120-1000
चक्री 60-350 100- 450
फुलझड़ी 30-350 80-400
राकेट 100-350 120-450
स्काई शॉट 250-6500 300-1500
दीक्षा शर्मा ने कहा कि पारंपरिक पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखे कम हानिकारक होते हैं और वायु प्रदूषण को कम करते हैं। ग्रीन पटाखों से चिंगारियों निकलेंगी ज्यादा प्रदूषण नहीं होगा।
अमित शर्मा ने कहा कि पर्यावरण को कम करने के लिए ग्रीन पटाखे सबसे अच्छे रहते हैं, और न ही इससे कोई जानलेवा हानि होती है।
अरूणाभ ने कहा कि सामान्य पटाखे जलाने से हर दीवाली पर जलने के मामले बढ़ जाते हैं, लेकिन इस बार ग्रीन पटाखों के कारण इन मामलों में सुधार देखने को मिला सकता है।
प्रदीप शर्मा ने कहा कि ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं, लेकिन इनसे प्रदूषण कम होता है। जो पर्यावरण के लिए लाभदायक है।
नवनीत ने कहा कि ग्रीन पटाखे जलाना एक नई सोच को दर्शाता है। मैं तो खुद भी यही खरीदूंगा और अपने दोस्तों को भी खरीदने के लिए कहूंगा।
अक्षय वर्मा ने कहा कि हर दीवाली पर छोटे बच्चे पटाखे चलाने के लिए उत्साहित रहते हैं, लेकिन जलने के डर से उन्हें चलाने नहीं देते। ग्रीन पटाखों को बच्चें भी जला सकते हैं।