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फोरलेन ने पहाड़ों को बना दिया खतरनाक, हो सकता है बड़ा हादसा

Sun, 30 Jul 2017 01:54 PM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, सोलन
राकेश शर्मा/अमर उजाला, सोलन Updated Sun, 30 Jul 2017 01:54 PM IST
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solan parwanoo four lane construction work leads to landsliding from hills and mountains

सोलन से परवाणू नेशनल हाईवे पर पानी के साथ पत्थर भी बरस रहे हैं। फोरलेन के लिए पहाड़ के नीचे खुदाई की गई है। भारी मशीनों से खुदाई की वजह से चट्टानों की पकड़ ढीली पड़ गई है।

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कच्ची मिट्टी में फंसीं भारी भरकम चट्टानें और टनों के हिसाब से मलबा सड़क पर आ रहा है। फोरलेन निर्माण एजेंसी ने एक तरफ मार्ग खुला रखा है, लेकिन दूसरी तरफ का मार्ग वाहन ले जाने लायक नहीं है। 
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दत्यार, चक्की मोड़, जाबली व सनवारा के बीच ऊंची पहाड़ियां हैं। ढलान पर बड़े-बड़े पत्थर अटके हैं, जो कभी भी मौत बनकर नीचे से गुजर रहे वाहनों पर गिर सकते हैं।
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धर्मपुर के सुक्की जोहड़ी, कंडा चौक, कसौली चौक पर सड़क किनारे डंगे लगाने का कार्य चल रहा है। यहां इस्तेमाल होने वाली सामग्री को सड़क पर गिराया गया है। ऐसे में हादसे का खतरा और भी बढ़ गया है।

जाबली में ओवरब्रिज की तैयारी 
फोरलेन मार्ग करीब 39 किलोमीटर लंबा होगा। कंपनी फिलहाल उन्हीं जगहों पर कटिंग कर रही है, जो सुलभ हैं। जाबली तक करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

फोरलेन में पहाड़ों से गिर रहे पत्थरों के अलावा दूसरी बड़ी बाधा रेलवे ट्रैक की है, जिसका तोड़ अब ओवरब्रिज से ढूंढा जा रहा है। जाबली फाटक से ओवरब्रिज के माध्यम से फोरलेन को पार लगाया जाएगा। 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

solan parwanoo four lane construction work leads to landsliding from hills and mountains

कालका-शिमला हाईवे को फोरलेन बनाने के लिए परवाणू से सोलन (चंबाघाट) तक चले फोरलेन के कार्य के दौरान नेशनल हाईवे के दोनों ओर पेड़ों की कटाई व डंगे लगाने का कार्य चल रहा है। 

पेड़ों को काटकर सड़क के किनारे रखा जा रहा है। सड़क को चौड़ा करने के लिए डंगे लगाए जा रहे हैं, जिससे सड़क की चौड़ाई बेहद कम हो गई है। 

फोरलेन का निर्माण कार्य कर रही कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर देवाशीश पात्रा ने कहा कि बारिश के चलते पहाड़ से मलबा गिर रहा है, जिसकी वजह से एक तरफ के यातायात को रोक दिया गया है। हादसे की आशंका को देखते हुए कंपनी ने यह कदम उठाया है। 

लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता एसपी गुप्ता का कहना है कि पहाड़ खोदने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है। ये मशीनें कंपन पैदा करती हैं, जिससे मिट्टी व पत्थर अपनी जगह से हिल जाते हैं। 

बाद में बारिश का पानी इनमें भरता है और मलबा खिसकने लगता है। फोरलेन पर चट्टानें व मलबा गिरने का दूसरा बड़ा कारण मिट्टी की ढीली परत में पर्याप्त स्लोप न मिल पाना है। कटिंग की ऊंचाई 30 मीटर है तो उसमें कम से कम 20 मीटर की ढाल होनी चाहिए जो नहीं बन पा रही है।

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