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बर्फबारी से किसानों-बागवानों की चांदी, जगी उम्मीद
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 09 Feb 2016 10:15 AM IST
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लंबे अरसे से बर्फबारी और बारिश न होने से निराश हो चुके किसानों-बागवानों में आशा की किरण जगी है। अब ताजा बर्फबारी से बागवान अपने बगीचों में नए पौधे रोप सकेंगे। उचित नमी मिलते ही बागवान अपने बगीचों में तौलिये भी कर सकते हैं। ग्राफ्टिंग के लिए अभी जल्दी है।
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इसके लिए बागवान मौसम का अगला रुख देखें। प्रदेश के बागवानों को यह सलाह डा. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डा. विजय सिंह ठाकुर ने दी है। सोमवार को डा. विजय सिंह ठाकुर ने कहा कि पिछले दिनों हुई बारिश और बर्फबारी के बाद हिमाचल के अधिकतर हिस्सों में बागवान अब पौधरोपण कर सकते हैं।
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सेब और नाशपाती की आधुनिक और बेहतरीन किस्मों को लगाने के साथ ही बागवान स्टोन फ्रूट्स भी रोप सकते हैं। स्टोन फ्रूट्स में पलम, आडू़, खुमानी आदि के पौधों को रोपा जा सकता है। विभिन्न तरह केपौधों के लिए नौणी विश्वविद्यालय में भी संपर्क किया जा सकता है। डा. ठाकुर ने कहा कि अभी ऊपरी क्षेत्रों में बर्फ गिरी है, जबकि निचली ऊंचाई वाले क्षेत्रों से ये पिघलने लग गई है।
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जैसे ही जमीन में गीलापन खत्म हो जाए और खुदाई के लिए उपयुक्त नमी हो तो बागवानों को सेब के बगीचों में तौलिये भी कर लेने चाहिए। आने वाले समय में बगीचों में खाद और उर्वरक डालने भी जरूरी है। उवर्रकों में नाइट्रोजन, फासफोरस और पोटाश मिश्रित खादों को पेड़-पौधों और मृदा की जरूरत के अनुसार डाला जा सकता है।
पेयजल में भी मिली राहत
हिमाचल प्रदेश में लोगों को बारिश और बर्फबारी से बड़ी राहत मिली है। राज्य के कई क्षेत्रों में एकाएक जल स्तर भी बढ़ गया है। इससे कई क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत भी खत्म हो गई है। इससे सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की कई योजनाओं पर लोड भी कम हो गया है। हालांकि, गर्मियों तक पेयजल स्रोतों को दुरुस्त रखने के लिए अभी तक हुई बर्फबारी और बारिश नाकाफी मानी जा रही है।
इसके बावजूद आगामी दिनों में अगर अच्छी बर्फबारी या बारिश होती है तो इससे प्रदेश में ग्राउंट वाटर का स्तर बढ़ जाएगा और गर्मियों में भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। हिमाचल प्रदेश के सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि प्रदेश में बर्फ और बारिश से पेयजल स्रोत काफी खुल गए हैं। हिमाचल प्रदेश जल बोर्ड के उपाध्यक्ष हरभजन सिंह भज्जी ने कहा है कि मौजूदा बर्फबारी और बारिश से पानी के स्रोत रिचार्ज हुए हैं। इससे फायदा हुआ है। हालांकि, अभी और भी बर्फबारी और बारिश होने की जरूरत है।
अच्छी फसल की जगी उम्मीद
प्रदेश में सेब की अच्छी फसल के लिए वांछित चिलिंग ऑवर्स निचले और मध्यवर्ती क्षेत्रों में स्पर किस्मों के लिए पूरे हो गए हैं। स्पर और लो चिलिंग किस्मों के लिए चिलिंग ऑवर्स 800 से 1200 घंटे चाहिए होते हैं। कोटखाई के जलटाहर गांव के प्रगतिशीत बागवान प्रेम चौहान ने कहा है कि निचले क्षेत्रों की लो चिलिंग किस्मों के लिए चिलिंग ऑवर्स पूरे होने से वे खुद राहत की सांस ले रहे हैं। बाकी जहां रॉयल किस्में हैं, वहां अभी भी इसके पूरे होने की जरूरत है।
परिवहन निगम के 42 रूट बंद
बर्फबारी के कारण ऊपरी शिमला यातायात के लिए बहाल नहीं हुआ है। एचआरटीसी के 42 रूट बंद है, जगह जगह परिवहन निगम की बसें फंसी हैं। जो बसें ऊपरी शिमला भेजी गई थीं, वह अभी शिमला नहीं पहुंच पाई हैं। नारकंडा में बर्फबारी के चलते नेशनल हाईवे-5 बंद हो गया है। खड़ापत्थर अभी भी यातायात के लिए बहाल नहीं हुआ है। रोहडू और चौपाल के लिए बसों को वाया पांवटा भेजा गया है वहीं रिकांगपिओ के लिए बसों को वाया बसंतपुर और सुन्नी चाबा होकर भेजा जा रहा है।