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हिमाचल: MIS में सेब बेचने वाले छोटे बागवानों को बड़ी राहत, 100 बोरी से कम पर नहीं देने होंगे राजस्व दस्तावेज
Wed, 07 Jan 2026 05:04 PM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 07 Jan 2026 05:04 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में एमआईएस के तहत सेब बेचने वाले ऐसे बागवान, जिन्होंने सौ बोरी से कम सेब बेचा था, उनसे अब राजस्व रिकॉर्ड यानी खतौनी, जमाबंदी या अन्य भूमि दस्तावेज नहीं लिए जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर...
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- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
शिमला हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े किसान-बागवान संगठन संयुक्त किसान मंच की मांग पर प्रदेश सरकार ने छोटे बागवानों को बड़ी राहत दी है। मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) में सेब बेचने वाले ऐसे बागवान, जिन्होंने सौ बोरी से कम सेब बेचा था, उनसे अब राजस्व रिकॉर्ड यानी खतौनी, जमाबंदी या अन्य भूमि दस्तावेज नहीं लिए जाएंगे। सरकार के निर्देशों के बाद हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) ने इस संबंध में बुधवार को अधिसूचना जारी कर दी है।
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एचपीएमसी की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि एमआईएस सीजन 2025 के दौरान निगम के खरीद केंद्रों पर सौ से कम सेब की बोरियां लाने वाले किसानों को केवल फ्रूट रसीद के आधार पर भुगतान किया जाएगा। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के राजस्व दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि, जिन बागवानों की ओर से सौ से अधिक सेब की बोरियां बेची गई हैं, उनसे पूर्व की तरह राजस्व रिकॉर्ड लिया जाएगा और भुगतान की शर्तें पहले जैसी ही लागू रहेंगी।
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संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने इस फैसले को किसान-बागवानों की बड़ी जीत करार दिया है। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत बागवानों को राजस्व दस्तावेज जुटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, जिससे भुगतान में भी देरी होती थी। मंच ने यह मुद्दा बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी के समक्ष उठाया था, जिस पर सकारात्मक कार्रवाई करते हुए सरकार ने एचपीएमसी को व्यवस्था बदलने के निर्देश दिए। हरीश चौहान ने कहा कि इस निर्णय से खासतौर पर छोटे बागवानों को राहत मिलेगी और एमआईएस के तहत सेब की खरीद प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और सुगम बनेगी।
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