Sirmour: पुलिस ने अंतरराज्यीय पशु चोर गिरोह का किया भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार; देसी कट्टा-रौंद भी बरामद
पुलिस ने अंतरराज्यीय पशु चोर गिरोह का भांडाफोड़ करते हुए हरियाणा निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने अंतरराज्यीय पशु चोर गिरोह का भांडाफोड़ करते हुए हरियाणा निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किए गए देसी कट्टा, 5 रौंद व टेंपो भी किए बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले करीब 10 सालों से देसी कट्टा रखे हुए थे। आरोपियों की आयु 30 साल से भी कम है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने यहां पहले भी तीन बार कालाअंब पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत रात को पशु चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। इसे लेकर मामले भी दर्ज किए गए हैं।
एसपी सिरमौर रमन कुमार मीणा ने पत्रकारवार्ता में बताया कि पुलिस थाना कालाअंब में 5 मार्च को सुरेंद्र पुत्र भूलर सिंह निवासी गांव कटोला डहर ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि दिनांक 4 मार्च की रात को इसकी पशुशाला से भैंसें चोरी करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने जैसे ही आरोपियों को देखा और वे टेंपो में मौके से फरार हो गए। आरोपियों फरार होते फायर किया। एसपी ने बताया कि शिकायत पर पुलिस ने तुरंत डीएसपी मुख्यालय रमाकांत ठाकुर के पर्यवेक्षण में पुलिस थाना प्रभारी मोहर सिंह के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। टीम ने अलग-अलग दिशाओं में आठ मुख्य मार्गों से होते हुए 74 लिंक मार्गों से 68 सीसीटीवी कैमरों का निरीक्षण करते हुए लगभग 98 किलोमीटर का रास्ता तय किया।
10 दिनों के भीतर मुख्य आरोपियों व उनके गांवों की पहचान की गई। पुलिस ने हरियाणा व उत्तर प्रदेश की सीमा पर हथनीकुंड के नजदीक जिला यमुनानगर हरियाणा से आरोपी असलम उर्फ(29) इसलाम निवासी गांव खैरी बास व सह आरोपी सद्दाम(24) निवासी गांव मुजाहिदपुर, फतेहपुर जिला सहारनपुर को गिरफ्तार किया गया। वारदात में इस्तेमाल टेंपो, मकान के आंगन से फायर आर्म व पांच रौंद बरामद किए हैं । एसपी ने बताया कि आरोपी सद्दाम के विरूद्ध चोरी, गोवध, गैंगस्टर अधिनियम के तहत हरियाणा व उत्तर प्रदेश राज्य में मामले पंजीकृत हैं।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
एसपी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ व साक्ष्यों के आधार पर पाया गया कि आरोपी सद्दाम पशुओं की मोहरी (पशु बाधने बाली रस्सी) को बेचने का काम करता था तथा मोहरी बेचने के बहाने हिमाचल में लोगों के घर आकर पशुओं की रेकी करता था। रेकी करने के बाद यह पशु तस्कर बिना नंबर का टेंपो को तिरपाल से ढककर सोमवार को हिमाचल राज्य में प्रवेश करते थे तथा पशुओं को रात में चुराकर दूसरे दिन सहारनपुर पशु मंडी में ले जाकर बेच देते थे।