Shyam Saran Negi: श्याम शरण नेगी कैसे बने देश के पहले मतदाता, दिलचस्प है कहानी, पढ़ें यहां
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विस्तार
देश के पहले मतदाता श्याम सरण नेगी का शनिवार तड़के निधन हो गया। श्याम सरण नेगी ने तीन दिन पहले बुधवार को कल्पा में अपने घर से पहली बार बैलेट पेपर से 14वीं विधानसभा के लिए मतदान किया था। आइए आपको बताएं किन्नौर के कल्पा निवासी श्याम सरण नेगी कैसे बने देश के पहला मतदाता। आजादी के बाद देश में पहली बार 12 फरवरी 1952 को मतदान हुआ, लेकिन फरवरी में बर्फबारी होने के चलते देश के जनजातीय इलाकों में चार महीने पहले 25 अक्तूबर 1951 को मतदान करवाने का फैसला लिया गया। उन दिनों 21 वर्ष पूरा करने वाले को मतदान का अधिकार था।
शिक्षक होने के चलते श्याम सरण नेगी की भी पहला चुनाव करवाने की ड्यूटी लगी। सुबह सात बजे से वोट डाले जाने थे। नेगी अपना पहला मत देना चाहते थे, इसलिए गांव के नजदीकी मतदान केंद्र कल्पा (पुराना नाम चिन्नी) में सुबह 6.00 बजे ही पहुंच गए। 6.10 बजे मतदान अधिकारी पहुंचे और उन्होंने अपना मत देने की इच्छा जताई। साथ ही ये भी बताया कि उनकी भी चुनाव के लिए दूसरे मतदान केंद्र में ड्यूटी लगी है। वहां तक पहुंचने के लिए उन्हें पैदल जाना पड़ेगा। ऐसे में अधिकारियों ने उनका सुबह 6.15 बजे पहला वोट डलवाया। इसी वजह से श्याम सरण नेगी देश के पहले मतदाता बने।
तीन-चार चुनाव बीत जाने के बाद पता चला, बने हैं पहले मतदाता
जिला किन्नौर के कल्पा निवासी नेगी अपना पहला वोट डालने के बाद ड्यूटी पर चले। उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी कि देश में उन्होंने पहला वोट डाला था। तीन-चार चुनाव बीत जाने के बाद जब इसकी पड़ताल हुई तो चुनाव आयोग के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि वे देश के पहले मतदाता बने हैं।
टीन के डिब्बे में डाला था अपना पहला मतपत्र
नेगी ने जब पहला वोट डाला था, उस समय मतपेटियों की व्यवस्था नहीं थी। टीन के डिब्बों में पार्टियों के चुनाव चिह्न की फोटोकॉपी चिपकाई गई थी। उस समय 85 फीसदी जनता अनपढ़ थी। उन्हें मतदान प्रक्रिया समझाना बेहद मुश्किल था। चुनाव चिह्न भी ग्रामीण परिवेश के हिसाब से लोगों की समझ में आने वाले दिए गए थे। जैसे कि बैलों की जोड़ी, दीपक, मिट्टी का लैंप।