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श्रावण नवरात्र में भी बंद रहेंगे शक्तिपीठों के कपाट, श्रद्धालुओं में छाई मायूसी
Fri, 17 Jul 2020 12:59 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमन वर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, ऊना
अमन वर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, ऊना
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 17 Jul 2020 12:59 PM IST
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फाइल फोटो
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प्रदेश में शक्तिपीठों के कपाट खोलने पर सरकार अभी फैसला नहीं ले पाई है। 21 जुलाई से श्रावण नवरात्र शुरू हो रहे हैं। श्रावण अष्टमी मेले में मां के दरबार में हजारों श्रद्धालु हाजिरी लगाते थे, लेकिन इस बार कोरोना के कारण मंदिरों के कपाट बंद होने से श्रद्धालुओं में मायूसी है। कोरोना वायरस फैलने के डर से सरकार ने 17 मार्च से शक्तिपीठों के कपाट बंद करवा दिए थे। इस कारण चैत्र नवरात्रों में श्रद्धालु मां के दर्शन नहीं कर पाए। श्रद्धालुओं ने घरों में रहकर ही पूजा-अर्चना की थी।
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सरकार होटल खोलकर सैलानियों को हिमाचल आने का निमंत्रण दे रही है, लेकिन शक्तिपीठों के कपाट खोलने पर फैसला नहीं ले पा रही है। शक्तिपीठों के कपाट बंद होने से पुजारी परिवारों के आय के साधन भी बंद हो गए हैं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे मंदिर पर आश्रित परिवारों की सहायता को भी सरकार ने कोई घोषण नहीं की है। मंदिरों के बाजारों में दुकानदारों का कारोबार भी ठप है। प्रदेश की पांच शक्तिपीठों में श्री बज्रेश्वरी देवी, श्री ज्वालामुखी, श्री नयना देवी, श्री चामुंडा देवी तथा श्री छिन्नमस्तिका धाम चिंतपूर्णी के बाजार में मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं पर आधारित कारोबारियों का काम भी ठप है।
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मंदिरों की राजनीति कर सत्ता पाने वाली पार्टी का रवैया उदासीन: मुकेश
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने भी शक्तिपीठों के कपाट न खोलने को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मुकेश ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है, उसे चलाने को दारू बिक्री जरूरी है। आखिर 1800 करोड़ का कारोबार है, राजस्व जुटाना है। उसी दौरान खबर आई कि सरकार ने मंदिर न खोलने का निर्णय भी लिया। दलील दी कि डीसी मंदिर खोलने के लिए राजी नहीं हैं। यह भी कहा फेस्टिवल के चलते भीड़ हो सकती है। कहा कि मंदिरों में ठेकों के बराबर आमदनी होती तो अलग बात होती। इसलिए मंदिर खोलना प्राथमिकता केसे हो सकती है।
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