Shimla Landslide: नितिका बोलीं- बर्थडे पर पापा के फोन का था इंतजार, सूचना आई मलबे में दब गया पूरा परिवार
परिवार में इकलौती बची नितिका का कहना है कि उसे 14 अगस्त का दिन कभी नहीं भूल सकता। पापा पवन शर्मा और भतीजी समायरा अभी भी लापता हैं।
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सावन का सोमवार और 14 अगस्त का वो दिन, नितिका कभी नहीं भूल पाएगी। 14 अगस्त को नितिका का जन्मदिन था। शिमला के समरहिल की नितिका की शादी लुधियाना में हुई है। पापा पवन शर्मा ने उसे बुलाया था, लेकिन खराब मौसम के चलते नहीं आ पाईं। नितिका का कहना है कि सुबह से ही उसे पापा के फोन का इंतजार था। हर बार बर्थडे पर विश करते थे। उनके मोबाइल फोन भी नहीं लग रहे थे। ऐसे में खबर आई कि सावन की शिवरात्रि की पूजा के लिए जिस शिव बावड़ी मंदिर में सात लोगों का पूरा परिवार पूजा करने गया है, वहां भूस्खलन हो गया है और सभी मलबे में दब गए हैं।
वह तुरंत शिमला के लिए निकलीं। शाम को यहां पहुंचीं तो देखा कि सात में से चार परिजन उनकी मां संतोष शर्मा, भाई अमन और भाई की बेटियों नायरा और साशा के शव मलबे से निकाले जा चुके थे। इन चार शवों को मुखाग्नि भी नितिका ने ही दी। तीसरे दिन उनके भाई अमन की पत्नी अर्चना का शव मिला, जिसका संस्कार अर्चना के भाई ने किया। परिवार में इकलौती बची नितिका का कहना है कि उसे 14 अगस्त का दिन कभी नहीं भूल सकता। पापा पवन शर्मा और भतीजी समायरा अभी भी लापता हैं। इतनी आस्था वाला परिवार और सभी एक साथ मलबे में दब जाएंगे, किसी ने नहीं सोचा था
नितिका की पड़ोसी चेतना ने बताया कि पूरा परिवार बहुत ही खुश था। वे औरों की मदद करते रहते थे। हमेशा शिव बावड़ी मंदिर जाया करते थे। 14 अगस्त को भी पूरा परिवार मंदिर गया हुआ था। अगर नितिका शिमला पहुंच जाती तो वह भी साथ ही मंदिर जाती। उनके साथ किरायेदार अधिवक्ता हरीश और उनकी पत्नी सहायक आचार्य मानसी भी पूजा करने के लिए मदिर गए थे। उनकी भी मौत हो गई। इतनी धार्मिक आस्था वाला परिवार और सभी एक साथ मलबे में दब जाएंगे, किसी ने नहीं सोचा था।
मंदिर जाते हरीश ने बेटी से कहा-थोड़ी देर में आ जाएंगे मम्मी-पापा
अधिवक्ता हरीश और उनकी पत्नी सहायक आचार्य मानसी की भी हादसे में जान चली गई। हरीश ने अपनी बेटी को घर पर ही छोड़ा था। मंदिर जाने से पहले उन्होंने अपनी बेटी को कहा था कि मम्मी–पापा थोड़ी देर में माथा टेककर लौट आएंगे। तुम यहीं घर पर रहना। आजकल उनकी बेटी नाना-नानी के पास है। वह बार-बार अपने मम्मी-पापा को याद कर रही है।
सात दिन से चप्पा-चप्पा छान रहे लापता नीरज के परिजन
समरहिल के शिव बावड़ी मंदिर में आई आपदा में लापता तीन लोगों में एक स्थानीय निवासी नीरज हैं। नीरज के परिजन भी सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस के जवानों के साथ सात दिन से मलबे में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। नीरज के भतीजे बोनी ने बताया कि जब तक उनके ताया का पता नहीं चलता, वह मंदिर क्षेत्र के चप्पे-चप्पे को खोजते रहेंगे। उन्होंने बताया कि लापता लोगों के परिजन और आसपास के लोग सुबह से देर रात तक मलबे में लापता लोगों को ढूंढने में लगे हुए हैं।