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शिमला: अदालत को गुमराह कर तथ्यों को छिपाने पर भरण-पोषण मामले में पति को राहत नहीं
Sun, 13 Sep 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 13 Sep 2026 05:00 AM IST
सार
अदालत ने भरण-पोषण से जुड़े मामले में दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका में 336 दिन की देरी को माफ करने की पति की अर्जी को खारिज कर दिया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अदालत को गुमराह कर तथ्य छिपाने पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी और नाबालिग बच्चों के गुजारा भत्ते से जुड़े मामले में पति को कोई राहत नहीं दी। अदालत ने भरण-पोषण से जुड़े मामले में दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका में 336 दिन की देरी को माफ करने की पति की अर्जी को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने पाया कि पति कार्यवाही से जानबूझकर बचता रहा और उसने कोर्ट में आवेदन दाखिल करते समय महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया। बता दें कि फैमिली कोर्ट पांवटा साहिब ने 15 सितंबर 2025 को पत्नी को 5,000 और उसके दो नाबालिग बच्चों को 3,000-3,000 रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश सुनाया था।
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याचिकाकर्ता इस आदेश के खिलाफ 336 दिनों की देरी से हाईकोर्ट पहुंचा था। पति ने दलील दी थी कि वह पेशे से ड्राइवर है और बाहर रहने के कारण उसे एकतरफा फैसले की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए पाया कि पति को कार्यवाही की पूरी जानकारी थी। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड खंगालने पर पाया कि एकतरफा कार्यवाही के आदेश को रद्द करवाने के लिए पति ने फैमिली कोर्ट में खुद अर्जी लगाई थी, जिसे कोर्ट ने 19 फरवरी 2025 को खारिज कर दिया था। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब पति को केस की पेंडेंसी और एकतरफा कार्यवाही का पता था, तब भी वह अदालत में उपस्थित होकर पक्ष रखने से बचता रहा। अदालत ने माना कि समयावधि समाप्त होने के बाद देरी माफ कराने के लिए उचित और ठोस कारण पेश करना अनिवार्य है।
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