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Shimla: बजट सत्र से पहले मांगों पर चर्चा नहीं की तो परिवार के साथ विस घेराव करेंगे बुजुर्ग

Tue, 17 Feb 2026 01:08 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 17 Feb 2026 01:08 PM IST
सार

पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने औपचारिक रूप से बजट सत्र शुरू होने से पहले पेंशनरों की मांगों पर चर्चा के लिए प्रदेश सरकार को अल्टीमेटम दिया है। 

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Shimla Himachal Pradesh Pensioners Joint Struggle Committee staged a sit-in at Chaura Maidan
चौड़ा मैदान में धरना प्रदर्शन करते पेंशनर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने औपचारिक रूप से बजट सत्र शुरू होने से पहले पेंशनरों की मांगों पर चर्चा के लिए प्रदेश सरकार को अल्टीमेटम दिया है। मंगलवार को चौड़ा मैदान में धरना-प्रदर्शन के दौरान संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने एलान किया कि अगर सरकार पेंशनरों की अनदेखी जारी रखती है तो प्रदेश भर से बुजुर्ग पेंशनर अपने परिवारों के साथ विधानसभा घेराव के लिए शिमला पहुंचेंगे और इसके लिए पूरी तरह मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार जिम्मेवार होगी। संघर्ष समिति ने कांग्रेस सरकार को पेंशनर और कर्मचारी विरोधी करार देते हुए मुख्यमंत्री पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। कहा कि प्रदेश के पेंशनरों के वित्तीय लाभ रोककर सरकार चल रही है। सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
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आरडीजी का बहाना बना कर यदि पेंशनरों का महंगाई भत्ता और एरियर फ्रीज किया गया तो सरकार को आगामी चुनावों में इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। समिति के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश ठाकुर, महासचिव इंद्र पॉल शर्मा और अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पेंशनरों से वादाखिलाफी की है। 28 नवंबर 2025 को धर्मशाला के जोरावार स्टेडियम में रैली के बाद मुख्यमंत्री ने समिति के शिष्टमंडल को विधानसभा बुलाकर आश्वासन दिया था कि सत्र समाप्त होने के एक सप्ताह के भीतर पेंशनरों को उनकी मांगों पर चर्चा के लिए बुलायेंगे।
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यह आश्वासन झूठा साबित हुआ। मुख्यमंत्री जी की कथनी और करनी में फर्क है। मुख्यमंत्री की नकारात्मक सोच से ही प्रदेश वित्तीय संकट में पंहुचा है। आरडीजी बंद होने के बाद डीए और एरियर फ्रीज करने की बात तो की गई है लेकिन सरकार अपने वेतन भतों, पेंशन कटौती और फिजूलखर्ची पर कोई बात नहीं हो रही।

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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की न तो सकारात्मक सोच है और न ही सही दिशा जिसने प्रदेश को भारी वित्तीय संकट में पहुंचा दिया है। प्रदेश पर इस समय एक लाख दस हजार करोड़ से भी ज्यादा ऋण हो चुका है, जबकि केंद्र सरकार ने प्रदेश के लिए राजस्व अनुदान घाटा बंद कर दिया है। हाल ही में प्रमुख वित्त सचिव हिमाचल सरकार नें प्रदेश की वित्तीय स्थिति प्रस्तुत की है उसमें बताया गया है कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भता फ्रीज किया जाएगा, पेंशनरों की बकाया राशि भी नहीं दिया जा सकता है, सहारा योजना, हिम केयर योजनाएं बंद करनी पड़ेंगी और भी बहुत सारी कटौतियों का हवाला दिया है। लेकिन माननीयों के वेतन भत्तों और पेंशन की कटौती और फिजूलखर्ची पर कोई भी सुझाव नहीं दिए हैं। जिससे लगता है कि सरकार पेंशनर्स और कर्मचारी विरोधी है और साथ में जन विरोधी भी है।

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