Shimla: बजट सत्र से पहले मांगों पर चर्चा नहीं की तो परिवार के साथ विस घेराव करेंगे बुजुर्ग
पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने औपचारिक रूप से बजट सत्र शुरू होने से पहले पेंशनरों की मांगों पर चर्चा के लिए प्रदेश सरकार को अल्टीमेटम दिया है।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की न तो सकारात्मक सोच है और न ही सही दिशा जिसने प्रदेश को भारी वित्तीय संकट में पहुंचा दिया है। प्रदेश पर इस समय एक लाख दस हजार करोड़ से भी ज्यादा ऋण हो चुका है, जबकि केंद्र सरकार ने प्रदेश के लिए राजस्व अनुदान घाटा बंद कर दिया है। हाल ही में प्रमुख वित्त सचिव हिमाचल सरकार नें प्रदेश की वित्तीय स्थिति प्रस्तुत की है उसमें बताया गया है कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भता फ्रीज किया जाएगा, पेंशनरों की बकाया राशि भी नहीं दिया जा सकता है, सहारा योजना, हिम केयर योजनाएं बंद करनी पड़ेंगी और भी बहुत सारी कटौतियों का हवाला दिया है। लेकिन माननीयों के वेतन भत्तों और पेंशन की कटौती और फिजूलखर्ची पर कोई भी सुझाव नहीं दिए हैं। जिससे लगता है कि सरकार पेंशनर्स और कर्मचारी विरोधी है और साथ में जन विरोधी भी है।
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