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शिमला: शहर के कोर और ग्रीन एरिया में घर बना सकेंगे लोग, कैबिनेट ने डेवलपमेंट प्लान को दी मंजूरी

Wed, 27 Apr 2022 10:20 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 27 Apr 2022 10:20 PM IST
सार

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में बुधवार को प्रदेश सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में शिमला के डेवलपमेंट प्लान को मंजूरी दी गई। आने वाले दिनों में अधिसूचना जारी होते ही शिमला शहर के कोर और ग्रीन एरिया में भवन निर्माण पर लगी सभी पाबंदियां खत्म हो जाएंगी।

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Shimla development plan  approved in himachal cabinet meeting : People will be able to build houses in the core and green areas of the city
शिमला शहर - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सालों से अपने सपनों का घर बनाने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। प्रदेश सरकार ने राजधानी के लिए तैयार किए डेवलपमेंट प्लान को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में बुधवार को प्रदेश सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्लान को मंजूरी दी गई। आने वाले दिनों में अधिसूचना जारी होते ही शिमला शहर के कोर और ग्रीन एरिया में भवन निर्माण पर लगी सभी पाबंदियां खत्म हो जाएंगी। इन क्षेत्रों के लोग नगर निगम से नक्शा पास करवाकर भवन निर्माण कर सकेंगे। एनजीटी के आदेशों के चलते नवंबर 2017 से शहर के कोर और ग्रीन एरिया में भवन निर्माण पर पाबंदी लगी है। प्लानिंग एरिया में भी अभी सिर्फ ढाई मंजिला भवन निर्माण की अनुमति दी जा रही है। 

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 डेवलपमेंट प्लान लागू होते ही प्लानिंग एरिया के लोग भी तीन मंजिला भवन बना सकेंगे। शिमला शहर के लिए करीब 43 साल बाद डेवलपमेंट प्लान तैयार किया है। टीसीपी विभाग ने यह प्लान तैयार किया है। फरवरी में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने इस प्लान को लांच किया था। इसके बाद 11 मार्च तक शहर की जनता से इस पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए। कुल 98 आपत्तियां लोगों ने दर्ज करवाई थी जिनका सुनवाई के दौरान निपटारा किया गया। इसके बाद टीसीपी ने दो दिन पहले ही यह प्लान मंजूरी के लिए सरकार को भेजा था। अब इसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अभी तक 1979 में बने अंतरिम प्लान के तहत ही शिमला शहर में निर्माण कार्य करवाए जा रहे थे। अब अधिसूचना जारी होते ही नए प्लान के तहत निर्माण कार्य होंगे। 
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अधिसूचना जारी होते ही लागू कर देंगे: प्लानर
टीसीपी विभाग के टाउन प्लानर केसी नैंटा ने कहा कि सरकार ने डेवलपमेंट प्लान को मंजूरी दे दी है। अधिसूचना जारी होते ही शिमला प्लानिंग एरिया में इसे लागू कर दिया जाएगा। इससे हजारों लोगों को राहत मिलेगी।
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शहर समेत 375 गांवों पर भी लागू होगा प्लान
टीसीपी विभाग की ओर से तैयार किया डेवलपमेंट प्लान शिमला शहर के अलावा 375 गांवों पर भी लागू होगा। शिमला और सोलन जिले के इन गांवों को भी प्लानिंग एरिया में शामिल किया है। इन पर भी डेवलपमेंट प्लान की शर्तें लागू होंगी। टीसीपी विभाग इनमें प्लान लागू करवाएगा।
   प्लानिंग एरिया में कुफरी स्पेशल एरिया के 47, शोघी विशेष क्षेत्र के 49, घणाहट्टी क्षेत्र के 36 जबकि अतिरिक्त प्लानिंग क्षेत्र के 188 गांव शामिल हैं। सुन्नी तहसील का एक, ठियोग के चार, सोलन के कंडाघाट तहसील के 50 गांव इसमें शामिल किए हैं। प्लान में जाठिया देवी समेत नए शहर बसाने की जो योजना है, उन्हें नए बाईपास रोड बनाकर आपस में जोड़ा जाएगा।

टाउन प्लानर प्रेमलता की टीम ने बनाया है प्लान
शिमला प्लानिंग एरिया का यह डेवलपमेंट प्लान टीसीपी के शिमला जिला की टाउन प्लानर रही प्रेमलता चौहान और उनकी टीम ने तैयार किया है। यह प्लान शिमला शहर की साल 2041 तक की जरूरत के हिसाब से तैयार किया गया है। 

जानिए किस एरिया में कितने निर्माण की मिलेगी छूट

1. ग्रीन एरिया
राजधानी में चिन्हित किए 17 ग्रीन क्षेत्रों में भी अब भवन निर्माण की मंजूरी मिलेगी। अभी यहां पाबंदी लगी है। लोग एक मंजिल के साथ रिहायशी एटिक का निर्माण कर सकते हैं। इस क्षेत्र में निर्माण की शर्तें सबसे सख्त रहेंगी। पेड़ काटकर निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। खाली जमीन पर ही भवन निर्माण की मंजूरी दी जाएगी। ग्रीन एरिया में सिर्फ रिहायशी भवन बन पाएंगे। व्यावसायिक निर्माण की छूट नहीं मिलेगी। ग्रीन क्षेत्र के लिए मंजिलें कम रखी हैं, लेकिन फ्लोर एरिया का अनुपात 1.75 की बजाय एक रखा है।

2. कोर एरिया
शहर के कोर एरिया में सर्कुलर रोड से ऊपर के क्षेत्र को शामिल किया है। ग्रीन एरिया की तरह कोर एरिया में भी अभी भवन निर्माण पर पाबंदी लगी है। प्लान लागू होते ही इस क्षेत्र में रिहायशी और व्यावसायिक दोनों तरह के भवन निर्माण के लिए दो मंजिलों के साथ पार्किंग फ्लोर और एटिक के निर्माण की छूट मिलेगी। इस एटिक का दोनों तरह के निर्माण में रिहायश के तौर पर इस्तेमाल हो सकेगा। इस क्षेत्र में बनने वाले रिहायशी भवनों और व्यावसायिक परिसरों की अधिकतम ऊंचाई 13 मीटर रहेगी।

नॉन कोर एरिया
शहर के सर्कुलर रोड से बाहर के क्षेत्र को नॉन कोर एरिया माना गया है। इसमें अभी ढाई मंजिला भवन निर्माण की छूट है। अब नया प्लान लागू होने से इस एरिया के लोग तीन मंजिला रिहायशी भवन बना सकेंगे। इसके अलावा पार्किंग फ्लोर अलग बना सकेंगे। पार्किंग के साथ रिहायश के लिए एटिक भी बन सकेगी। रिहायशी भवन की अधिकतम ऊंचाई 16.50 मीटर रहेगी। व्यावसायिक भवनों में चार मंजिलें बनाने की छूट रहेगी। पार्किंग फ्लोर और एटिक की भी सुविधा मिलेगी। अधिकतम ऊंचाई 21 मीटर रहेगी।

जाठियादेवी में बनेगा काउंटर मेगनेट टाउन
सिटी डेवलपमेंट प्लान में शिमला शहर की बढ़ती आबादी को लेकर भी कई प्रावधान किए गए हैं। जाठियादेवी में करीब एक लाख की आबादी वाला नया शहर बसाने की योजना है। इस काउंटर मेगनेट टाउन को बसाने का मकसद शहर से बढ़ती आबादी का बोझ कम करना है। इसके अलावा फागू, नालदेहरा, घंडल और चमयाणा में सैटेलाइट टाउन बनाए जाएंगे। इनमें आठ से दस हजार की आबादी को बसाने की योजना है। मुख्य शहर और नए कस्बों में यातायात को लेकर बाईपास रोड तैयार होंगे। शहर में रोपवे आधारित यातायात व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। रोपवे अथारिटी इसके लिए शहर में रोपवे का जाल बिछाने के काम पर काम भी कर रही है। नया प्लान अगले 20 साल यानि साल 2041 तक की जरूरतों को देखते हुए तैयार किया है।

रिहायश के तौर पर एटिक  का कर सकेंगे इस्तेमाल 

राजधानी में लागू होने वाले नए डेवलपमेंट प्लान की सबसे खास बात यह है कि पहली बार एटिक को रिहायश के तौर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी दी जाएगी। अभी इसकी मंजूरी नहीं मिलती है। रिहायश की सुविधा देने के लिए एटिक की ऊंचाई बढ़ाने का भी प्रावधान किया है।  टीसीपी के अनुसार नए भवनों में एटिक की ऊंचाई 2.75 की जगह तीन मीटर करने को छूट दी जाएगी। इसे रिहायश के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। शहर के कोर और नॉन कोर एरिया में भवन निर्माण के लिए सेटबैक के नए नियम भी लागू होंगे। इसके अनुसार 150 से 250 वर्ग मीटर जमीन पर बनने वाले भवनों के आगे दो मीटर, किनारों पर 1.5 मीटर जबकि पीछे 1.5 मीटर का सेटबैक छोड़ना होगा।

ग्रीन एरिया में लागू होंगी यह शर्तें
शहर में चिन्हित 17 ग्रीन क्षेत्रों में भी बना सकेंगे भवन
ग्रीन एरिया में बनेंगे सिर्फ रिहायशी भवन, चेंज ऑफ लैंड यूज की नहीं मिलेगी मंजूरी 
भवन निर्माण के लिए पहाड़ी की 3.50 मीटर तक ही कर पाएंगे खुदाई
हरे पड़े से दो मीटर जबकि वन क्षेत्र से पांच मीटर की दूरी पर ही निर्माण को मिलेगी मंजूरी
इस क्षेत्र के भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करनी होगी
पुराने भवनों के मालिक ओल्ड लाइन पर बना सकेंगे भवन

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