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शिमला: कीर्ति चक्र लौटाने राजभवन पहुंचे शहीद के नाराज परिजन
Mon, 21 Sep 2020 09:01 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 21 Sep 2020 09:01 PM IST
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शहीद के परिजन सीएम से मिले।
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल सरकार के वायदे पूरे न होने से नाराज शहीद के परिजन वीरता के लिए मिले कीर्ति चक्र कोलौटाने के लिए सोमवार को राजभवन पहुंच गए। हाथों में कीर्ति चक्र और शहीद की तस्वीर लिए कांगड़ा के चांबी से पहुंचीं शहीद की मां और परिजन राजभवन के गेट पर ही धरने पर बैठ गए। परिजनों से राज्यपाल तो
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नहीं मिले लेकिन राजभवन से लौट रहे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उनसे मुलाकात की। सीएम ने मामले की जानकारी न होने की बात कही। इस पर परिजन कीर्ति चक्र लौटाने पर अड़ गए। हालांकि, बाद में सीएम के आश्वस्त करने पर परिजन घर लौट गए। 18 साल पहले ऑपरेशन राइनो के दौरान अनिल चौहान ने शहादत पाई थी। उस दौरान प्रदेश सरकार ने उनके नाम पर स्थानीय स्कूल का नामकरण और स्मृति द्वार बनाने की घोषणा की थी। 18 साल से परिवार नेताओं और अफसरशाही के चक्कर काट रहा है।
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अनिल के परिजनों ने आरोप लगाया कि सरकारें सिर्फ आश्वासन देती हैं। एलान कर भूल जाती हैं। लेकिन अब हर शहीद का परिवार अपने बेटे का सम्मान न होने पर पदक वापस करेगा। हालांकि, परिजनों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री खुद अब हर शहीद के परिवार से किए लंबित वायदों को पूरा करेंगे। शहीद की मां बोलीं, किसी ने नहीं की सुनवाई शहीद अनिल की मां राजकुमारी ने बताया कि 15 सितंबर 2002 को असम में ऑपरेशन राइनो के दौरान सेना की 13 ग्रेनेडियर में तैनात रहे बेटे अनिल ने शहादत पाई थी। 2004 में कीर्ति चक्र मिला। तत्कालीन प्रदेश सरकार ने बेटे के सम्मान में स्कूल का नामकरण और स्मृति द्वार बनवाने का एलान किया था। उन्होंने कहा कि जिसकी शहादत का सम्मान नहीं किया जा रहा, उसके मरने के बाद मिले कीर्ति चक्र का क्या करेंगे।
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वायदों को किया जाएगा पूरा : जयराम
शहीद की मां से सीएम जयराम ने कहा कि राज्य सरकार उन शहीदों को पूरा सम्मान और आदर देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। वह शहीद अनिल चौहान के मामले को खुद देखेंगे। सरकार सुनिश्चित करेगी कि शहीदों के परिवारों से किए गए वायदों को पूरा कर उन्हें सम्मान दिया जाए।