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Shimla: राम मंदिर में कार्यक्रम का शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने किया बहिष्कार, जानें पूरा मामला

Thu, 24 Oct 2024 09:29 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 24 Oct 2024 09:29 PM IST
सार

शंकराचार्य गो हत्या को रोकने और गो माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए राजधानी के श्रीराम मंदिर में गो ध्वज की स्थापना के लिए  शिमला पहुंचे, लेकिन उन्होंने इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया है और जाखू मंदिर से ही संदेश दिया।

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Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati boycotted the program organized at Shri Ram temple, know the whole
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जाखू मंदिर में गो ध्वज की स्थापना की। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी के राम मंदिर में गो ध्वज की स्थापना करने शिमला पहुंचे ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने साईं बाबा की मूर्ति होने के कारण मंदिर का बहिष्कार कर दिया। वीरवार दोपहर दोपहर 12 बजे उन्होंने राम मंदिर में गो ध्वज स्थापित करना था। इससे पहले बुधवार रात को ही उन्हें सूचना मिली कि मंदिर में साईं बाबा की मूर्ति लगी है। इस पर उन्होंने मूर्ति हटाने की शर्त पर ही मंदिर में प्रवेश की बात कही। वीरवार को शंकराचार्य स्वागत समिति ने मंदिर में भगवान विष्णु के अवतारों के साथ लगी साईं बाबा की मूर्ति को पर्दे से ढकने के बाद शंकराचार्य से मंदिर आने की अपील भी की। साथ ही कार्यक्रम के बाद मूर्ति को हटवाने का प्रस्ताव भी रखा। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव सूद की ओर से भी मूर्ति हटाने का आश्वासन दिया था, लेकिन मूर्ति मंदिर में लगी होने से उन्होंने मंदिर आने से इन्कार कर दिया। शंकराचार्य यहां से जाखू स्थित हनुमान मंदिर चले गए और वहां पर गो ध्वज की स्थापना की। हालांकि, शंकराचार्य के आदेशनुसार बाद में दूसरा गो ध्वज राम मंदिर में गोपालमणि और देवेंद्र पांडे की अध्यक्षता में फहराया गया।

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शंकराचार्य ने कहा कि साईं बाबा का वैदिक शास्त्र और सनातन धर्म के किसी भी ग्रंथ में उल्लेख नहीं है। साईं बाबा एक विशेष समुदाय से संबंध रखते थे। कहा कि जहां साईं की पूजा की जाती है, उन सभी मंदिरों का हम बहिष्कार करते हैं। हम गो को माता मानते हैं और राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए अभियान चलाया है। इससे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में मंदिर में साईं की मूर्ति होने से उसका बहिष्कार किया था। उन्होंने कहा कि अगर मंदिर से मूर्ति हट जाती है तो मैं अंदर जाने के लिए तैयार था।
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मंदिरों में साईं की मूर्ति लगाना हमारे देवताओं का अपमान : शंकराचार्य
हनुमान मंदिर जाखू में गो ध्वज स्थापना के बाद शंकराचार्य ने हनुमान की 108 फीट ऊंची मूर्ति के पास पेड़ की छांव में बैठकर भक्तों को प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों में देवताओं के साथ साईं की मूर्ति लगाना हमारे देवताओं का अपमान है। ऐसा करने वालों की दुर्गति है। सनातन धर्म में अपनों से बड़ों के सामने पांव पर पांव रखकर बैठना निषेध है। साईं पांव पर पांव चढ़ाकर हमारे मंदिर में देवताओं के अगल- बगल में बराबर बैठ रहा है। इसे हम स्वीकार नहीं करते। कुछ लोग पैसे के लिए साईं की मूर्ति लगवा रहे हैं।

गो रक्षा को लेकर पीएम का रवैया ठीक नहीं
शंकराचार्य ने कहा कि नरेंद्र मोदी गाय के बछड़े को दुलारते हैं। उसे शॉल पहनाकर अपने घर में रखते हैं, वहीं दूसरी ओर जो गो मांस का निर्यात करते हैं उनके साथ खड़े हैं। यह दोहरा चरित्र समझ में नहीं आ रहा। शंकराचार्य ने कहा कि गो माता पूजनीय है। लेकिन सरकार ने अभी तक गो को पशु की श्रेणी में रखा हुआ है। गो माता को राष्ट्र माता का दर्जा नहीं दे सकते तो ऐसा कह दें कि गो हमारे लिए पशु है। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ मुस्लिमों की एक साथ वोट पड़ने पर सरकार उनकी बात को प्रमुखता से सुनती है। उनके काम करवा जा रहे हैं, वहीं हिंदुओं की ओर मुंह फेर लेते हैं। गो माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने पर ही वोट डाली जाए तो सरकार को हिंदुओं की ताकत का एहसास होगा।

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