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Shimla News: पहलगाम घटना के विरोध में एसएफआई का प्रदर्शन
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लोगों से सद्भाव बनाए रखने की अपील
सरकार से घटना की जांच करवाने की उठाई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के विरोध में एसएफआई की हिमाचल विश्वविद्यालय इकाई ने वीरवार को विवि परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों से सद्भाव बनाए रखने की अपील की गई।
एसएफआई की अखिल भारतीय कमेटी के आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन में आतंकवाद खत्म करने की मांग की गई। एसएफआई के राज्य सहसचिव उपेंद्र ने कहा कि एसएफआई की राज्य कमेटी इस घटना की कड़ी निंदा करती है, जिसमें 28 निर्दोष लोगों की जान चली गई। उन्होंने कश्मीरी छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव, मिल रही धमकियों और मानसिक उत्पीड़न की निंदा की। कहा कि कुछ विचारधारा और समुदाय विशेष के लोग इस आतंकी हमले को मुद्दा बनाकर सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। एसएफआई इसका विरोध करती है। कहा कि आतंकवादियों का कोई धर्म या जाति नहीं होती। उन्होंने सभी छात्रों से मिलकर रहने और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ने की अपील भी की। उपाध्यक्ष सन्नी सेक्टा ने कहा कि आतंकवादियों का देश की सीमा के अंदर हथियारों के साथ आना और निर्दोषों की जान लेना कहीं न कहीं हमारे रक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
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सरकार से घटना की जांच करवाने की उठाई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के विरोध में एसएफआई की हिमाचल विश्वविद्यालय इकाई ने वीरवार को विवि परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों से सद्भाव बनाए रखने की अपील की गई।
एसएफआई की अखिल भारतीय कमेटी के आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन में आतंकवाद खत्म करने की मांग की गई। एसएफआई के राज्य सहसचिव उपेंद्र ने कहा कि एसएफआई की राज्य कमेटी इस घटना की कड़ी निंदा करती है, जिसमें 28 निर्दोष लोगों की जान चली गई। उन्होंने कश्मीरी छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव, मिल रही धमकियों और मानसिक उत्पीड़न की निंदा की। कहा कि कुछ विचारधारा और समुदाय विशेष के लोग इस आतंकी हमले को मुद्दा बनाकर सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। एसएफआई इसका विरोध करती है। कहा कि आतंकवादियों का कोई धर्म या जाति नहीं होती। उन्होंने सभी छात्रों से मिलकर रहने और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ने की अपील भी की। उपाध्यक्ष सन्नी सेक्टा ने कहा कि आतंकवादियों का देश की सीमा के अंदर हथियारों के साथ आना और निर्दोषों की जान लेना कहीं न कहीं हमारे रक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
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