सोसायटी के खाते में डाले नर्सरियों और बगीचों से कमा लिए करोड़ों रुपये
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बागवानी विभाग की नर्सरियों और बगीचों से होने वाली करोड़ों की आय सोसायटी के खाते में डाली जा रही है। इस राशि को सोसायटी के कर्मचारियों के वेतन पर खर्च किया जा रहा है। नर्सरियों और बगीचों से होने वाली सालाना करीब चार करोड़ की आय का विभाग को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इसे विश्व बैंक वित्त पोषित प्रोजेक्टों और सोसायटी के खर्चे चलाए जा रहे हैं।
नियमों के अनुसार इस राशि को बागवानी विभाग के खाते में जमा किया जाना होता है, लेकिन पिछले करीब तीन साल से नर्सरियों-बगीचों से होने वाली आय को सोसायटी के खाते में डाला जा रहा है। इससे विभाग को 12 करोड़ रुपये की चपत लग रही है। इससे पहले लगभग 35 सालों से इस राशि को बागवानी विभाग के खाते में जमा किया जाता रहा है।
क्या कहते हैं बागवानी निदेशक
हर साल बागवानी विभाग की नर्सरियों और बगीचों से चार करोड़ रुपये की आय होती रही है। सोसायटी में करीब 15 कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और कुछ विभाग से भेजे गए हैं।
गौरतलब है कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने यह सोसायटी इसलिए बनाई थी कि विश्व बैंक की वित्तीय मदद से बागवानों को अच्छी किस्म के सेब के पौधे उपलब्ध कराए जा सकें। सोसायटी ने अब तक कितना काम किया, यह कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना स्पष्ट है कि यह सोसायटी आज भी विभाग की नर्सरियों और बगीचों की आय पर निर्भर है।
बागवानी निदेशक एमएल शर्मा ने कहा कि बागवानी विभाग की नर्सरियों और बगीचे से होने वाली आय को सोसायटी के खाते में डाला जा रहा है। सोसायटी का काम अच्छा चलना शुरू हो जाएगा तो यह राशि बागवानी विभाग के खाते में जमा की जाएगी।