बड़ा घपला: फर्जी हस्ताक्षर कर डकार लिया बच्चों और महिलाओं का राशन
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शिमला शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों में पौष्टिक आहार आवंटन के नाम पर बड़ा गड़बड़झाला चल रहा है। रजिस्टर में पौष्टिक आहार बांट दिया गया है, लेकिन यह कोटा लेने वालों के पास पहुंचा ही नहीं। रजिस्टर में बाकायदा इनके नाम हैं और साइन भी किए गए हैं।
पर इनका कहना है कि इन्होंने राशन लिया ही नहीं। आशंका है कि फर्जी साइन कर पौष्टिक आहार के नाम पर मिलने वाला राशन कहीं ओर ही जा रहा है। हैरानी है कि विभाग की ओर से आवंटन को लेकर कोई चैक नहीं है।
मामला सामने आने के बाद जब अफसरों की बात की गई तो तर्क दिया गया कि शिकायत आएगी तो जांच कर लेंगे। यानि, शिकायत आएगी तभी जांच होगी वरना जो चल रहा है...उसे चलने दो। इन्हें क्या फर्क पड़ता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में नौनिहालों तथा गर्भवती और धात्री महिलाओं को सरकार की ओर से यह राशन आवंटित किया जाता है। कोटे का पौष्टिक आहार का राशन गायब कर दिया जा रहा है। दस्तावेजों में उन्हें यह राशन दिया गया बताया गया है।
‘अमर उजाला’ की टीम ने शिकायत के बाद जब शांकली स्थित एक आंगनबाड़ी केंद्र जाकर हकीकत जाननी चाही तो कई खुलासे हुए।
राशन की बात सुनकर पात्र महिलाओं के उड़े होश, कहा कभी लिया ही नहीं
शाकंली के सागरी हाउस आंगनबाड़ी केंद्र में 22 नौनिहाल पंजीकृत हैं, इसमें दो नौनिहाल ही केंद्रों में आ रहे हैं। इसके अलावा 6 गर्भवती महिलाओं, 5 धात्री महिलाओं को हर महीने घर के लिए न्यूट्रीशियन दिया जाता है।
वहीं 6 माह से 3 साल के 26 नौनिहालों को भी घर के लिए पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। टीम ने पौष्टिक आहार के आवंटन का सच जानने के लिए लोगों के घरों का दौरा किया तो पता चला कि पिछले कई महीनों से राशन लिया ही नहीं है।
कागजों में बाकायदा उनके साइन भी किए गए हैं। ये सुनकर महिलाएं हैरान रह गई। कुछ महिलाओं ने कहा कि उन्होंने पिछले तीन महीने से केंद्र से कुछ नहीं लिया है। कुछ महिलाओं ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें आज तक आंगनबाड़ी केंद्रों से पौष्टिक आहार मिला ही नहीं।
पात्र लोग बोले हमें तो कभी नहीं मिला राशन
केस-1
कल्पना ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र से तीन महीने से कोई भी राशन नही मिला रहा है। उन्हें कभी भी इसकी सूचना नहीं दी गई।
केस-2
रिचा को जब पता चला कि उनके नाम का आहार कागजों में दे दिया गया है और बाकायदा साइन भी किए गए हैं तो रिचा ने कहा कि उन्होंने कभी भी आंगनबाड़ी केंद्र से पौष्टिक आहार नहीं मिला है। उसने कभी साइन नहीं किए।
निशा ने बताया कि आज तक आंगनबाड़ी केंद्र से न्यूट्रीशियन नही मिला है। उन्हें तो यह भी पता नहीं है कि कब आंगनबाड़ी केंद्रों से पौष्टिक आहार का आवंटन किया जाता है।
मिष्ठी की माता दीपिना ने बताया कि उनकी दो साल की बेटी का नाम तो पंजीकृत कर दिया गया था लेकिन कभी भी आंगनबाड़ी से किसी तरह का पौष्टिक आहार नहीं मिला है।
शिकायत नहीं, गड़बड़ी है तो जांच करेंगे
बाल विकास परियोजना के टीएचआर वितरण में गड़बड़ी की कोई शिकायत नही है। यदि कहीं पर इस तरह की गड़बड़ी हो रही है तो इसकी जांच की जाएगी। वितरण के समय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आंगनबाड़ी स्तरीय मोनिटरिंग एवं रिव्यु कमेटी के सदस्य, स्थानीय पार्षद और परिवेशकों महिला के सदस्य को शामिल करने के बारे में निर्देश जारी किए गए हैं।
इसके अलावा परिवेशकों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि हर महीने कम से कम तीन आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर पोषाहार वितरण लाभार्थियों के साथ बैठक करें।-ममता पॉल, बाल विकास परियोजना अधिकारी शहरी शिमला
हजारों की एंट्री, केंद्र पहुंच रहे मुश्किल से सैकड़ों
83 आंगनबाड़ी केंद्रों में 8358 नौनिहालों की एंट्री है। जबकि, आंगनबाड़ी केंद्र तक सिर्फ 714 बच्चे ही पहुंच रहे हैं। इनके आवंटन में गड़बड़ी की जा रही है।
ये आहार दिया जाता है
चावल, सोया, बिस्कुट, मीठा दलिया, न्यूट्री मिक्स, हलवा, मसाला, नमक आदि।