मुश्किल में एचपीयू प्रशासन, एकजुट हुए छात्र
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प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी और प्रत्यक्ष चुनाव पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाने के फैसलों के खिलाफ सभी छात्र संगठन एक हो गए हैं। एसएफआई, एबीवीपी और एनएसयूआई ने बुधवार को विवि में साझा मोर्चा बनाकर उग्र प्रदर्शन किया।
पुलिस बल के बावजूद तीनों संगठनों ने पुस्तकालय के बाहर इन दोनों फैसलों के खिलाफ ढाई घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्र एकता जिंदाबाद, विवि प्रशासन और कुलपति के खिलाफ गूंजे नारों के साथ एक साथ वंदे मातरम..., इंकलाब जिंदाबाद... और जय हो के नारों के बीच तीनों संगठनों के नेताओं एसएफआई के राज्य सचिव मुनीश शर्मा, एबीवीपी के बाबूराम और एनएसयूआई के बलविंद्र ने आम सभा को संबोधित किया।
इन छात्र नेताओं ने मंच से ऐलान किया कि अब प्रशासन के खिलाफ आर पार की जंग लड़ने का समय आ गया है। उन्होंने इसमें शामिल होने के लिए आम छात्रों का आह्वान किया।
जारी रहेगा आंदोलन
छात्र नेताओं ने कहा कि जब तक विवि प्रशासन इन दोनों फैसलों के खिलाफ वार्ता के लिए नहीं बुलाता और फीस बढ़ोतरी को वापस नहीं लेता और चुनाव की तिथि घोषित नहीं करता तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
संगठन नेताओं ने कहा कि विवि की छात्र शक्ति तीनों संगठन हैं, वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार के लिए मिलकर प्रशासन से जंग लड़ेंगे। विवि प्रशासन और कुलपति को फैसला वापस लेने पर मजबूर किया जाएगा।
इस आंदोलन को अपनी विचारधारा को किनारे रखकर लड़ा जाएगा और जरूरत पड़ी तो लाठियां भी खाएंगे। प्रदेश भर में शिक्षा बंद और चक्का जाम करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
आपस के झगड़े से लाभ नहीं
प्रदर्शन के दौरान तीनों छात्र संगठन नेताओं ने माना कि लड़ाई झगड़े से किसी लाभ नहीं होता, उन्होंने इसके लिए गलती भी स्वीकार की, मगर छात्र संघ चुनाव बहाली और फीस बढ़ोतरी वापस लेने को तीनों संगठनों की एक ही आवाज थी।
विश्वविद्यालय में इन दो मुख्य मुद्दों पर एकजुट हुए तीनों संगठनों के बाद चुनाव बहाल हों, फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस हो या न हो, मगर इतना जरूर है कि जितने दिन आंदोलन चलेगा मोर्चा बना रहेगा, विवि में छात्र संगठनों के बीच हिंसा होने की संभावनाएं कम होंगी।
विवि प्रशासन, सरकार की मुश्किलें बढ़ना तय
तीनों संगठनों ने मिलकर प्रदेश भर एक साथ आंदोलन खड़ा किया तो, विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार की मुश्किलें बढ़ना तय है। इसके साथ ही परिसरों में धरने प्रदर्शनों को रोकने के लिए पुलिस को भी खासी कसरत करनी पड़ेगी।
क्या कहते हैं छात्र नेता
एसएफआई की राज्य कमेटी के सचिव मुनीश शर्मा ने कहा कि यदि फीस बढ़ोतरी और प्रत्यक्ष एससीए चुनाव पर प्रतिबंध लगाने के फै सले वापस न लिए तो छात्रों का आंदोलन और उग्र होगा, जो चक्का जाम, धरने प्रदर्शन के साथ भूखहड़ताल तक भी जा सकता है।
एबीवीपी के प्रदेश सहमंत्री नवनीत कौशल ने कुलपति और सरकार को चेताया है कि यदि चुनाव बहाल न किए गए और फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस न लिया तो एबीवीपी पूरे प्रदेश भर में उग्र छात्र आंदोलन खड़ा करेगी।
एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष रिंपल चौधरी ने कहा कि एससीए चुनाव पर रोक लगाना छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनना है। इसे किसी सूरत में बदाश्त नहीं किया जाएगा।