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Himachal News: हिमाचल प्रदेश में बनीं 46 समेत देशभर की 141 दवाओं के सैंपल हुए फेल; कंपनियों को नोटिस जारी

Wed, 22 Apr 2026 10:07 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 22 Apr 2026 10:07 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में बनीं कई दवाइयों के सैंपल फेल हो गए हैं। वहीं, कंपनियों को नोटिस जारी कर बाजार से स्टॉक वापस मंगवाने के आदेश जारी कर दिए हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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Samples of 141 medicines nationwide including 46 manufactured in Himachal have failed quality tests
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में बनीं निमोनिया, अल्सर, मधुमेह, किडनी की 46 दवाओं समेत देश भर में तैयार 141 दवाओं के सैंपल फेल हो गए। सोलन की 23, सिरमौर व ऊना की 11-11 और कांगड़ा की एक कंपनी के सैंपल मानकों पर सही नहीं पाए गए हैं।  राज्य ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि कंपनियों को नोटिस जारी कर बाजार से स्टॉक वापस मंगवाने के आदेश जारी कर दिए हैं।

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सीडीएसओ व राज्य प्रयोगशाला की ओर से लिए गए सैंपलों में प्रदेश में 46 सैंपल मानकों पर सही नहीं पाए गए है। इनमें बद्दी की पार्क कंपनी के निमोनिया, सेसपो फार्मास्युटिकल की दर्द, हेल्थ बायोटेक की फंगल, कालाअंब की एलेसर बायोटेक की त्वचा संक्रमण, बद्दी के हिल्लर लैब की बुखार, ऊना के स्विश गार्नियर की बीपी, नालागढ़ के लोसिस रेमिडीज कंपनी की उल्टी, पांवटा साहिब की जी लैबोरेटरी के यूरिक एसिड, बायोलेब्स की जीवाणू नाशक दवा के सैंपल फेल हुए हैं।

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सोलन की फार्मा चेमको लैबोरेटरी कंपनी की सूखी खांसी, सिरमौर के मोगीनंद की बेल क्योर रेमिडीज कंपनी की संक्रमण, शिवा बॉयोजेनेटिक कंपनी की पेट का संक्रमण, अमस्टर लैब कंपनी की पेट के संक्रमण, कालाअंब के एथेन लैब की पेट के संक्रमण, ऊना की एस्टिक्स हेल्थकेयर कंपनी की मधुमेह, ऊना की ही टाईटेनिस फार्मा की बुखार की दवा के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे।

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बरोटीवाला की एक्टीनोवा कंपनी की एलर्जी, कालाअंब की एथेन लाइफ साइंस की उल्टी, ऊना के मेफ्टो आर्गेनिक की मधुमेह, परवाणू की एक्सो ड्रग की उच्च रक्तचाप, बद्दी की यूनिस्पीड कंपनी की खांसी, पांवटा साहिब के थ्रीबी कंपनी की मधुमेह, सिरमौर के मोगीनंद की जिम फार्मुलेशन की विटामिन डी थ्री, मानपुरा के नेशनल लैबोरेटरी कंपनी की पैरों के संक्रमण की दवा के सैंपल फेल हो गए। ऊना की टाईटेनस कंनपी की संक्रमण, स्टेनफोर्ड कंपनी की एसिडिटी, परवाणू जेडआरएस फार्मास्युटिकल कंपनी की मस्तिष्क की रक्त प्रवाह, ऊना के श्यागुल लैबोरेटरी कंपनी की बलगम वाली खांसी, ऊना की ही हसरस बायोटेक कंपनी की परजीवी संक्रमण, कालाअंब की सिसटोल रेमिडीज कंपनी की दांत दर्द की दवा के सैंपल मानकों पर सही नहीं पाए गए हैं। 

झाड़माजरी के विनस बॉयोसाइंस कंपनी की दर्द की दवा, नालागढ़ के प्रोस्पेरिटी ड्रग कंपनी व स्पेकर बायोटेक कंपनी के पेट के अल्सर, ऊना की स्पेन फॉर्मूलेशन कंपनी की किडनी की दवा के तीन सैंपल, कांगड़ा के सीएमजी कंपनी की दस्त, बद्दी के सोलीटेयर रेमीडीज कंपनी की आंतों की सूजन की दवा, पांवटा साहिब की जी लैबोरेटरी कंपनी की यूरिक एसिड की दवा के सैंपल फेल हो गए हैं।

बद्दी की केसोफ्ट हेल्थ केयर कंपनी की आयरन की कमी, बद्दी की मार्टिन एंड ब्राऊन कंपनी की एसिड, सोलन की रोमा फार्मा कंपनी की सीने में जलन की दवा, फार्मा रूट्स हेल्थ केयर कंपनी की उच्च रक्तचाप की दवा का सैंपल फेल हुआ है। 

दवा उद्योगों पर नए नियम लागू, सीटी-05 आवेदन से पहले देनी होगी सूचना
दवा उद्योगों के लिए केंद्र ने क्लीनिकल ट्रायल (सीटी) और निर्यात से जुड़ी आवेदन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने फॉर्म सीटी-05 के तहत किए जाने वाले कुछ आवेदनों के लिए पूर्व सूचना प्रणाली को लागू किया है। यह प्रणाली हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों पर भी लागू होगी। इसके तहत अब फॉर्म सीटी-05 के तहत कुछ आवेदनों में पहले से सूचना देना जरूरी होगा। यह नियम 21 अप्रैल से लागू हुए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने मंगलवार को इसे लेकर सभी राज्यों काे सर्कुलर जारी किया है। उन्होंने कहा कि अब केवल निर्यात के लिए किए जाने वाले कुछ क्लीनिकल अध्ययन और बायोइक्विवेलेंस ट्रायल शुरू करने से पहले उद्योगों को सुगम पोर्टल पर पूर्व सूचना देनी होगी। 

नई व्यवस्था के तहत केवल उन्हीं दवाओं पर यह नियम लागू होगा, जो भारत या अमेरिका, जापान, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में पहले से मंजूर हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा आवेदन के साथ एथिक्स कमेटी की मंजूरी लगानी होगी। ट्रायल में कम से कम 18 स्वयंसेवक शामिल करना जरूरी होगा। सीडीएससीओ की पुष्टि मिलने के बाद ही अध्ययन शुरू किया जा सकेगा। इसे लेकर जनवरी में अधिसूचना जारी कर दी थी, जिसमें 90 दिन बाद नई प्रणाली को लागू किए जाने की स्पष्ट आदेश दिए गए थे। प्रदेश में बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ और जिला ऊना में सैकड़ों दवा उद्योग स्थापित हैं। 
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