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Shimla News: रिद्धिमा बनीं एसएफआई की आरकेएमवी इकाई की प्रधान
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संगठन के सम्मेलन में हुई ताजपोशी
भाजपा सरकार के कार्यकाल में बढ़ा महिलाओं का उत्पीड़न
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एसएफआई की आरकेएमवी इकाई का बुधवार को 35वां सम्मेलन हुआ। इसमें कॉलेज की नई कार्यकारिणी का गठन कर रिद्धिमा को प्रधान और कृतिका को सचिव चुना गया।
सम्मेलन में 23 सदस्यीय कार्यकारिणी गठित की गई। सम्मेलन का उद्घाटन एसएफआई के राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सबसे अधिक शोषण महिलाओं और बच्चों का हो रहा है। कह कि केंद्र में जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है तब से महिला उत्पीड़न बढ़ता जा रहा है। यह सम्मेलन उन उत्पीड़ित महिलाओं के लिए आंदोलन का रास्ता तैयार करेगा जो आज सामाजिक आर्थिक,राजनीतिक और घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। आरकेएवमी हिमाचल प्रदेश का एकमात्र कन्या महाविद्यालय हैं। कॉलेज का अपना खेल मैदान तक नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सरकार वापस ले, लिंग संवेदनशील कमेटी, छात्र संघ चुनाव बहाल किए जाएं। जिला उपाध्यक्ष पवन कुमार ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति के नाम पर शिक्षा का निजीकरण, व्यापरीकरण कर रही है। देश में लगभग 13 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जो शिक्षा से वंचित हैं। इसके लिए हमारी मौजूदा सरकारें जिम्मेदार हैं। प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा बेरोजगार राज्य बन गया है। शिक्षा में हिमाचल प्रदेश का स्थान 21 नंबर पर पहुंच गया है जहां से पता चलता है, प्रदेश में कांग्रेस सरकार द्वारा किस तरीके से शिक्षा को एक वस्तु की तरह बेचा जा रहा है। नई अध्यक्ष बनीं रिद्धिमा ने कहा कि छात्राओं के लिए कॉलेज परिसर में सुविधाओं के लिए एसएफआई संघर्ष करेगी।
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भाजपा सरकार के कार्यकाल में बढ़ा महिलाओं का उत्पीड़न
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एसएफआई की आरकेएमवी इकाई का बुधवार को 35वां सम्मेलन हुआ। इसमें कॉलेज की नई कार्यकारिणी का गठन कर रिद्धिमा को प्रधान और कृतिका को सचिव चुना गया।
सम्मेलन में 23 सदस्यीय कार्यकारिणी गठित की गई। सम्मेलन का उद्घाटन एसएफआई के राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सबसे अधिक शोषण महिलाओं और बच्चों का हो रहा है। कह कि केंद्र में जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है तब से महिला उत्पीड़न बढ़ता जा रहा है। यह सम्मेलन उन उत्पीड़ित महिलाओं के लिए आंदोलन का रास्ता तैयार करेगा जो आज सामाजिक आर्थिक,राजनीतिक और घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। आरकेएवमी हिमाचल प्रदेश का एकमात्र कन्या महाविद्यालय हैं। कॉलेज का अपना खेल मैदान तक नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सरकार वापस ले, लिंग संवेदनशील कमेटी, छात्र संघ चुनाव बहाल किए जाएं। जिला उपाध्यक्ष पवन कुमार ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति के नाम पर शिक्षा का निजीकरण, व्यापरीकरण कर रही है। देश में लगभग 13 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जो शिक्षा से वंचित हैं। इसके लिए हमारी मौजूदा सरकारें जिम्मेदार हैं। प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा बेरोजगार राज्य बन गया है। शिक्षा में हिमाचल प्रदेश का स्थान 21 नंबर पर पहुंच गया है जहां से पता चलता है, प्रदेश में कांग्रेस सरकार द्वारा किस तरीके से शिक्षा को एक वस्तु की तरह बेचा जा रहा है। नई अध्यक्ष बनीं रिद्धिमा ने कहा कि छात्राओं के लिए कॉलेज परिसर में सुविधाओं के लिए एसएफआई संघर्ष करेगी।
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