आरक्षण के खिलाफ हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ेगा कर्मचारी महासंघ
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सामान्य वर्ग कर्मचारी कल्याण महासंघ 85वें संविधान संशोधन के खिलाफ उच्च न्यायालय में लड़ाई लड़ेगा। प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप जसवाल ने कहा कि प्रदेश अनुसूचित जाति कर्मचारी फेडरेशन, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है।
इसमें प्रदेश सरकार और सामान्य वर्ग कर्मचारी कल्याण महासंघ को पार्टी बनाया गया है। महासंघ ने फैसला लिया है कि इस न्याय की लड़ाई को हर स्तर पर लड़ा जाएगा।
हिमाचल में 85 वां संविधान संशोधन किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने सामान्य तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की है कि वे इस न्याय की लड़ाई में महासंघ का भरपूर सहयोग दें।
मौजूदा आरक्षण असंवैधानिक
प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि आल इंडिया इक्वेलिटी फोरम बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में 23 अगस्त, 2017 को दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि केंद्र सरकार की नौकरियों में पदोन्नतियों में दिया जा रहा मौजूदा आरक्षण असंवैधानिक है।
इस निर्णय के अनुसार केंद्र सरकार की नौकरियों में पदोन्नतियों में आरक्षण समाप्त है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों में पदोन्नतियों में आरक्षण पर चल रहे विवाद पर सुप्रीमकोर्ट ने एक अहम निर्णय दिया है कि पदोन्नतियों में दिया जा रहा
आरक्षण असंवैधानिक है तथा पदोन्नत कर्मचारियों /अधिकारियों को अपने मूल स्थान पर लौटना होगा। वर्तमान स्थिति यह है कि आरक्षित वर्ग से जो बाद में सरकारी सेवा में आए हैं, वे अपने से पहले आए हुए कर्मचारियों के साहब बने हुए हैं। आने वाले चुनावों में प्रत्याशियों से आरक्षण पर खुलकर प्रश्न किए जाएंगे।