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शोध में खुलासा, इंटरनेट डॉक्टर की सलाह से सेहत को हो रहे ये बड़े नुकसान

Mon, 12 Sep 2016 07:44 PM IST
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 12 Sep 2016 07:44 PM IST
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research reveals that only 44 percent online doctors are reliable

किसी भी बीमारी या उसके इलाज की जानकारी लेने के लिए वर्चुअल डॉक्टर की सलाह लेना सेहत पर भारी पड़ सकता है। यू-ट्यूब जैसे विजुअल सर्च प्लेटफार्मों में मिलने वाले बीमारियों के इलाज से जुड़े ज्यादातर वीडियो तथ्यों से परे हैं। अमेरिका की कनसास यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर और डॉ. आरपीजी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के अध्ययन से यह खुलासा हुआ है।

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देखा जा रहा है कि पूरी दुनिया में वर्चुअल डॉक्टर के तौर पर लोग यू-ट्यूब तथा अन्य मेडिकल साइट्स को लोग ज्यादा तवज्जो देने लगे हैं। नए ट्रेंड को देखते हुए अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ अरकनसास, कनसास यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर और हिमाचल के डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने संयुक्त रूप से इस पर रिसर्च शुरू की।
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वीडियो में आधे से ज्यादा तथ्य गलत

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अध्ययन से पता चला कि विभिन्न बीमारियों के लिए यू-ट्यूब पर मौजूद वीडियो में से आधे से ज्यादा तथ्यों से परे थे। रिसर्च टीम ने सुझाव दिया कि यू-ट्यूब के वीडियो पर पूरी तरह भरोसा न किया जाए और डॉक्टर या विशेषज्ञों के  परामर्श के बिना इलाज हरगिज शुरू न करें।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि बीमारी की परंपरागत दवाओं के बजाय वैकल्पिक चिकित्सा के वीडियो ज्यादा थे। सर्च के दौरान 37.2 फीसदी वीडियो वैकल्पिक चिकित्सा से संबंधित मिले। वैकल्पिक चिकित्सा सामान्य तौर पर परंपरागत दवाओं से संबंधित है।

केवल 44 फीसदी वीडियो ही भरोसेमंद

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अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों ने यू-ट्यूब पर न्यूरोपैथी, पैरीफेरल न्यूरोपैथी, डायबिटिक न्यूरोपैथी, न्यूरोपैथी काजेज और न्यूरोपैथी ट्रीटमेंट जैसे शब्दों को सर्च किया। सर्च के दौरान महज 44.6 फीसदी वीडियो ही ऐसे मिले, जिन्हें स्वास्थ्य सेवा के अनुभवी ने अपलोड किया था।

43.9 फीसदी वीडियो ऐसे थे जो चीरोप्रैक्टिक चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल करने वालों द्वारा डाले गए थे। इसके अलावा सर्च के दौरान महज 15.9 प्रतिशत फार्माकोलॉजिकल ट्रीटमेंट (दवा से संबंधित) संबंधी वीडियो मिले।

 

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वीडियो में दी जानकारी के आधार पर इलाज करना जोखिम लेने जैसा

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‘यू-ट्यूब के प्रति लोगों के झुकाव को देखते हुए बीमारियों के इलाज से संबंधित अपलोड वीडियो के अध्ययन की आवश्यकता महसूस की गई। अध्ययन में पाया गया कि बिना डॉक्टरी सलाह के केवल वीडियो में दी जानकारी के आधार पर इलाज करना जोखिम लेने जैसा है।’ - डॉ. सुनील कुमार रैना (अध्ययनकर्ता, राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज)

- गूगल के मुताबिक किए जाने वाले 20 सर्च में से एक स्वास्थ्य संबंधी।
- नए ट्रेंड के मद्देनजर गूगल भी 400 बीमारियों से जुड़ी जानकारी अपलोड कर चुकी है।
- गूगल ने भी इन जानकारियों को डॉक्टरी सलाह के रूप में न लेने की चेतावनी भी दी थी।

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