देश में सबसे ऊंचाई पर 8000 वर्ग किमी क्षेत्र में चला रेस्क्यू ऑपरेशन, बचाई 3 हजार लोगों की जान
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समुद्र तल से 16500 फीट की ऊंचाई में बर्फ से लकदक लाहौल-स्पीति के करीब 8 हजार वर्ग किलोमीटर के दायरे में देश का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। बर्फ में फंसे विदेशी सैलानियों समेत करीब तीन हजार लोगों की जान बचाई गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन वायुसेना, बीआरओ, सरकार और स्थानीय लोगों की मदद से चलाया गया। शुक्रवार को सूरजताल में फंसे सैलानियों के अंतिम दल को केलांग पहुंचाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन में वायु सेना के चीता समेत अन्य छह हेलीकॉप्टरों की मदद ली गई।
बारालाचा, सरचू, भरतपुर, जिंगजिंगबार, सुरजताल, चंद्रताल, बातल और छतडू जैसे दुर्गम इलाकों से करीब 3 हजार देशी-विदेशी सैलानियों समेत ट्रक चालक, मजदूर और शोधार्थियों की जान बचाई गई। हालांकि, गर्भवती महिला समेत तीन लोगों ने दम तोड़ दिया।
2850 लोगों को किया गया रेस्क्यू
कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा के नेतृत्व में लाहौल-स्पीति प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन को बिना दूरसंचार और बिजली के ही अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि रेस्क्यू ऑपरेशन और एक दिन भी लंबा खिंचता तो कई लोगों की जान जा सकती थी, क्योंकि घाटी में फिर से बर्फबारी शुरू हो गई थी।
इधर, लेह की तरफ सेना के लद्दाख स्काउट्स और डोगरा रेजिमेंट हिमाचल की सरहद पर अभी भी एहतियातन ग्राउंड रेकी कर रही है। जिंगजिंगबार समेत घाटी के कई हिस्सों से रोहतांग टनल और किन्नौर के रास्ते करीब 2850 लोगों को रेस्क्यू किया गया है।
सेना के हेलीकॉटर से बर्फ में फंसे 191 लोगों को निकाला गया है। इनमें 30 विदेशी सैलानी हैं। इसमें बीआरओ की बड़ी भूमिका रही। स्थानीय लोगों ने बर्फ में फंसी जिंदगियों को बचाने में सरकार की मदद की। - डॉ. रामलाल मारकंडा, कृषि, आईटी एवं जनजातीय विकास मंत्री।
4 दिन के भीतर रिकॉर्ड 200 किमी के दायरे में बर्फ हटाई
बर्फबारी के बाद शून्य तापमान के बीच बारालाचा इलाके में सड़क बहाल कर बीआरओ ने करीब 85 सैलानियों को जिंगजिंगबार से निकाला। बीआरओ ने टीम वर्क से 4 दिन के भीतर रिकॉर्ड 200 किमी के दायरे में सड़क से बर्फ हटाई।
बर्फबारी से एक दिन पहले बीआरओ के केलिंग सराय और जिंगजिंगबार ट्रांजिट कैंप के लिए खाद्य सामग्री आपूर्ति की थी। यह सैलानियों की जान बचाने के काम आई। - कैप्टन मेहुल, सेकेंड इन कमांड 70 आरसीसी
बचाव अभियान के दौरान रात तीन बजे भी रोहतांग दर्रे के समीप से 2 महिलाओं समेत 9 लोगों को रेस्क्यू किया गया। इस दौरान खुद हमें भी दो रातें टनल के नॉर्थ पोर्टल में गुजारनी पड़ीं। -अश्वनी कुमार चौधरी, डीसी लाहौल-स्पीति।
शव को बर्फ में छोड़ चार दिन बाद पैदल केलांग पहुंचे 21 लोग
हिमाचल व जम्मू-कश्मीर की सीमा में भारी बर्फबारी में फंसे 22 नेपाली मजदूरों में से एक की ठंड और भूख से मौत हो गई। सभी 21 लोग शव को बर्फ में छोड़ चार दिन तक पैदल शुक्रवार को केलांग पहुंचे। इनमें से 12 को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पांच लोगों को गैंगरीन हो गया है, जबकि अन्य को आंखों में तकलीफ हो रही है। 22 सितंबर को हुई भारी बर्फबारी के बीच 22 नेपालियों के दल ने कारगिल के करग्या गांव में शरण ली। 25 सितंबर को मौसम खुलने पर ये लोग लाहौल की तरफ रवाना हुए।
शिंकुला दर्रे में पैदल सफर के दौरान हिमाचल सीमा में प्रवेश करते ही एक नेपाली ने दम तोड़ दिया। शव को वहीं छोड़ अन्य नेपाली पैदल चार दिन बाद लाहौल के दारचा गांव पहुंचे। यहां उन्हें रेस्क्यू टीम के सदस्य जिप सदस्य तंजिन कारपा, विजय, मनु व संजय मिले।
इसके बाद 12 नेपाली मजदूरों को केलांग अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल करवाया गया है। तंजिन कारपा ने बताया कि करग्या से लाहौल पहुंचे मजदूरों ने साथी की मौत होने की बात कही है।
बताया कि लगातार भूखे प्यासे रहने व ठंड में शिंकुला दर्रा पार करते समय साथी की मौत हो गई। वहीं, सीएमओ डीडी शर्मा ने बताया कि उपचार के दौरान पांच लोगों में गैंगरीन पाई गई। अन्य की आंखों में तकलीफ है, जिन्हें उपचार दिया जा रहा है।