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मनी लांड्रिंग केस: पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह व पत्नी को कोर्ट से मिली राहत

Fri, 18 May 2018 01:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Fri, 18 May 2018 01:16 PM IST
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Relief from court to Virbhadra Singh in money laundering case

अदालत ने सात करोड़ रुपये के मनी लांड्रिंग मामले में हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को पेशी से स्थायी छूट प्रदान कर दी है। अदालत ने इस मामले में वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी समेत अन्य आरोपियों को 22 मार्च को जमानत प्रदान कर दी थी।

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पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार ने वीरभद्र सिंह व प्रतिभा की अर्जी पर सुनवाई के बाद उन्हें मामले में आरोप तय होने तक पेशी से छूट प्रदान की है। मामले की अगली सुनवाई 5 जुलाई को होगी। 
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दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय ने चार्जशीट के साथ पेश किए गए दस्तावेज की कॉपी प्रेम राज व लवण कुमार रोच को दे दिए। कोर्ट ने इन दस्तावेजों का निरीक्षण कर अगली तारीख पर पक्ष रखने का निर्देश बचाव पक्ष को दिया है। ईडी ने बीमा एजेंट आनंद सिंह चौहान के खिलाफ सितंबर 2016 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
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अदालत ने इसके मद्देनजर ईडी को पूरक आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। आनंद चौहान को ईडी ने 8 जुलाई 2017 को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी के अलावा यूनिर्वसल ऐपल एसोसिएट के मालिक चुन्नी लाल चौहान, प्रेम राज व लवण कुमार रोच को पूरक आरोप पत्र में नामजद किया है। इन पर मनी लांड्रिंग रोकथाम अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।

Relief from court to Virbhadra Singh in money laundering case

एजेंसी ने सीबीआई के केस के आधार पर मनी लांड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया था। ईडी का आरोप था कि वीरभद्र सिंह ने 28 मई  2009 से 18 जनवरी 2011 और 19 जनवरी 2011 से 26 जून 2012 के दौरान केंद्रीय मंत्री रहते हुए आय से अधिक धन अर्जित किया था।

उस काले धन को वीरभद्र ने अन्य आरोपियों व आनंद सिंह के जरिए बीमा में निवेश किया था। सीबीआई के अनुसार आरंभिक जांच में पाया गया कि वीरभद्र सिंह ने दौरान 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर आय से अधिक अर्जित की थी।

आय से अधिक संपत्ति मामले में चार्जशीट के साथ दिए गए दस्तावेजों के विषय में वीर भद्र सिंह की ओर से अर्जी दायर कर कहा गया कि जो दस्तावेज सीडी में दिए गए हैं जो पुराने फॉरमेट में है और कंप्यूटर पर चल नहीं रही है।

इसलिए यह दस्तावेज नये फॉरमेट की सीडी में दिलवाये जाए। कोर्ट ने इस अर्जी पर सीबीआई से जवाब 28 मई तक जवाब मांगा है।

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