शिखर सम्मेलन: पहाड़ी प्रदेशों में किसान न्यूनतम आय आयोग बनाने की सिफारिश
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सतत पर्वतीय विकास शिखर सम्मेलन में किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए किसान न्यूनतम आय आयोग गठित करने की सिफारिश रखी गई है। आयोग की स्थापना के अलावा हिमालयी राज्यों की ओर से दी गई ईको सिस्टम सेवाओं को प्रोत्साहित करना और पहाड़ी किसानों के जलवायु परिवर्तन के अनुसार खुद को ढालने की कला पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने अगली पीढ़ी के किसानों की जरूरतें पूरी करने के लिहाज से उपयोगी सभी तंत्रों पर विचार रखे।
शूलिनी विवि में दो दिन चर्चा के बाद इन सिफारिशों की रूपरेखा तय की गई। शिखर सम्मेलन की सिफारिशें शिमला में हिमालयी क्षेत्र में लगभग एक दर्जन राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रतिनिधियों के सम्मेलन में प्रस्तुत जाएंगी। अन्य प्रमुख सिफारिशों में ईको सिस्टम सेवाओं के लिए किसानों की क्षतिपूर्ति को ईको सिस्टम तैयार करना, ग्रीन सेस का प्रावधान, ग्रीन बांड्स और ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड की स्थापना है।
हिमालयी राज्यों की क्षतिपूर्ति की सिफारिश
ब्रांड हिमालय के विकास के लिए भी आह्वान किया गया। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए हिमालयी राज्यों की क्षतिपूर्ति की सिफारिश की गई।सम्मेलन के समापन पर सामाजिक न्याय एवं सहकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने कहा कि शिखर सम्मेलन में की गई सिफारिशों का अध्ययन सरकार की ओर से कार्यान्वयन के लिए किया जाएगा।
आठ देशों में फैले हिमालयी क्षेत्र को भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाना चाहिए। आईएमआई के अध्यक्ष सुशील रामोला ने चुनौतियों का सामना करने के लिए एकसाथ आने की आवश्यकता पर बल दिया।
कहा कि हिमालयी क्षेत्र हिमनदों के पिघलने, बाढ़, धूल भरी आंधियों और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रतिकूल रूप से प्रभावित है। शूलिनी विवि के कुलपति पीके खोसला के अलावा चार पूर्व मुख्य सचिव, पांच कुलपति, सिविल सोसायटी के सदस्य और आईएमआई के सलाहकार शामिल हुए।