अपनी ही सरकार के खिलाफ विधायक धवाला ने खोला मोर्चा, निदेशक की नियुक्ति पर उठाए सवाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा पर ज्वालामुखी कॉलेज में नियमों के खिलाफ 33 शिक्षकों की भर्ती करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा एक चहेते को सभी नियम दरकिनार कर असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्त करने का आरोप लगाया है।
धवाला ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को शिकायत पत्र भेजकर निदेशक को तत्काल हटाने और मामले की विजिलेंस से जांच की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर विधानसभा में इस मामले को उठाने की चेतावनी भी दी है।
मंगलवार दोपहर तीन बजे सचिवालय में रमेश धवाला ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर उच्च शिक्षा निदेशक पर हमला बोलते हुए कांग्रेस सरकार के समय में गलत तरीके से ज्वालाजी कालेज में नियुक्तियां करने का मामला उठाया।
निदेशक पर लगाए ये आरोप
कहा कि उच्च शिक्षा निदेशक जब ज्वालाजी कॉलेज में प्रिंसिपल थे तो उन्होंने 33 कर्मचारियों को पीटीए के तहत भर्ती किया। पीटीए फंड के 25 लाख इन्हें वेतन के रूप में दिया। कॉलेज में 35 लोगों का स्टाफ पहले से था।
आरोप लगाया कि साल 2011-12 में ज्वालाजी कॉलेज में पीरियड आधार पर इतिहास के सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार हुए। इसमें संजय कुमार छठे नंबर पर थे। बावजूद इसके इन्हें तैनाती दी गई।
कॉलेज के अधिग्रहण का फैसला 2013 में हुआ, उस समय इनकी नियुक्ति को अपात्र पाया गया। इन्हें दोबारा पीरियड आधार पर रखा। 2014 मेें अपने ही स्तर पर अनुबंध पर रख लिया। निदेशक बनने के बाद चहेते सहायक प्रोफेसर को नियमित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया गया।
कैबिनेट को गुमराह कर नियमित करवाने के आदेश जारी कर दिए। कहा कि डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा निदेशक बनने के लिए पात्रता भी पूरी नहीं करते हैं। बावजूद इसके निदेशक पद पर नियुक्त किया गया है। बताया कि इस मसले को शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से उठाया था, लेकिन उन्होंने इसे नजरंदाज किया।
निदेशक ने धवाला के आरोपों पर किया पलटवार
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने रमेश धवाला के आरोपों पर पलटवार किया और कहा कि ज्वालाजी कॉलेज निजी कॉलेज था। मेरे पास इसके प्रिंसिपल का अतिरिक्त कार्यभार था। 2015-16 में कॉलेज की पीटीए कमेटी ने विद्यार्थियों के हित में कुछ कर्मचारी और प्रवक्ता पीटीए के तहत रखे थे।
गैर सरकारी कॉलेज में यह नियुक्तियां अस्थाई तौर पर की गईं। निजी कॉलेज की पीटीए सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है। साल 2016 में कॉलेज का सरकार ने अधिग्रहण किया। सरकारी कॉलेज बनते ही इन कर्मियों को कार्यभार मुक्त कर दिया।
संजय कुमार की नियुक्ति कैबिनेट का फैसला है। निदेशक पद पर उनकी नियुक्ति सरकार ने की है। इस पद के लिए वह सभी तरह की पात्रता पूरी करते हैं। कहा कि यह सभी आरोप मेरी ईमानदारी, कर्मठ और ऊर्जावान छवि को धूमिल करने का एक षड्यंत्र है।
प्रेस कांफ्रेंस में धवाला को आया शिक्षा मंत्री का फोन
रमेश धवाला की सचिवालय में चल रही प्रेस कांफ्रेंस के दौरान शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज का फोन आया। शिक्षा मंत्री ने धवाला को कहा कि प्रेस कांफ्रेंस करने से पहले बात तो कर लेते। इस पर धवाला ने कहा मैंने पहले भी आपको बताया था। अब फिर से बोल रहा हूं। आप मामले की जांच करवाओ।