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पूर्व सैनिकों के सीने का नासूर बनी वन रैंक-वन पेंशन

Mon, 24 Aug 2015 10:03 AM IST
Updated Mon, 24 Aug 2015 10:03 AM IST
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protest at jantar mantar for one rank one pension.

वन रैंक-वन पेंशन लागू होने से प्रदेश के तकरीबन सवा लाख पूर्व सैनिकों को लाभ होगा। पूर्व सैनिकों की मानें तो वन रैंक-वन पेंशन को रोकने के पीछे अफसरशाही का हाथ है। मुद्दे पर पूर्व सैनिक लीग इकाई हमीरपुर के जिला उपाध्यक्ष एसकेएस चंबियाल ने कहा कि वन रैंक-वन पेंशन राजनीतिक मुद्दा बन गया है। पूर्व कैप्टन लाल चंद का कहना है कि अगर सेवानिवृत्त सैनिक को किसी भी विभाग में सेवा का मौका दिया जाता है तो उन्हें वन रैंक-वन पेंशन की जरूरत नहीं रहेगी।

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सेवानिवृत्त कर्नल धर्मेंद्र पटियाल, स्कवाड्रन लीडर बृज लाल धीमान का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद मांगों को लेकर उन्हें सड़कों पर धक्के खाने पड़ रहे हैं। इंडियन एक्स सर्विस मूवमेंट के प्रदेशाध्यक्ष सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशहाल सिंह, जिला संयोजक सेवानिवृत्त कैप्टन हेतराम ने बताया कि केंद्र सरकार की लापरवाही से वन रैंक-वन पेंशन लागू होने से लटक रही है।
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क्या है वन रैंक वन पेंशन-
वन रैंक वन पेंशन मतलब अलग-अलग समय पर रिटायर हुए एक ही रैंक के दो फौजियों को समान पेंशन देना। फिलहाल रिटायर होने वाले लोगों को उनके रिटायरमेंट के समय के नियमों के हिसाब से पेंशन मिलती है। यानी जो लोग 25 साल पहले रिटायर हुए हैं उन्हें उस समय के हिसाब से पेंशन मिल रही है जो बहुत कम होती है।
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लागू करने में क्या है अड़चन?-
ब्यूरोक्रेसी उलझा रही है। अगर सेना में वन रैंक-वन पेंशन लागू होती है तो दूसरी सेवाओं में भी इसकी मांग उठने लगेगी। ऐसे में सरकार इतने संसाधन कहां से लाएगी। इसे कैसे और कब से लागू किया जाए और इसके लिए पैसा आखिर कहां से आएगा।

यह हो रहा है नुकसान-
इंडियन एक्स सर्विस लीग ऊना के प्रवक्ता राजेंद्र कुमार शर्मा का कहना है कि वन रैंक, वन पेंशन लागू न होने से सबसे ज्यादा नुकसान करीब एक दशक पूर्व रिटायर हुए फौजियों को हो रहा है। वर्तमान में रिटायर हो रहे सैनिकों और पुराने पूर्व सैनिकों की पेंशन में बड़ी विसंगति है। इधर, पालमपुर भूतपूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष सीडी सिंह गुलेरिया तथा प्रवक्ता कुलदीप राणा ने कहा कि वन रैंक-वन पेंशन लागू न होने से नए और पुराने पेंशनरों में भारी अंतर है। पुराने भूतपूर्व सैनिकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

यह होगा फायदा-
पूर्व सैनिक कल्याण समिति के प्रदेशाध्यक्ष सूबेदार प्रकाश चंद ने कहा कि इसके पीछे अफसरशाह लोगों का हाथ है। अक्तूबर 2005 तक सेवानिवृत्त हुए पूर्व सैनिकों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। यदि वन रैंक-वन पेंशन लागू हो जाए तो पूर्व सैनिकों की पेंशन में लगभग तीन हजार रुपये का इजाफा होगा। इतना ही फायदा सैनिकों की विधवाओं को होगा।

जंतर-मंतर पर धरने की तैयारी

protest at jantar mantar for one rank one pension.

वन रैंक-वन पेंशन की मांग को लेकर पूर्व सैनिक जंतर-मंतर पर धरने की तैयारी में हैं। द ऋषि मार्कंडेय भूतपूर्व सैनिक परिवहन सहकारी एवं कल्याण सभा सीमित जुखाला के उपाध्यक्ष सूबेदार दौलत राम ठाकुर ने वन रैंक-वन पेंशन जारी नहीं होने पर सरकार के प्रति रोष जताया है।

केंद्र ने किया पूर्व सैनिकों से धोखा-
पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन लागू न करके प्रधानमंत्री ने पूर्व सैनिकों से बड़ा धोखा किया है। चुनाव से पहले हरियाणा के रेवाड़ी की रैली में पीएम ने वादा किया था कि उनकी सरकार बनने के बाद सबसे पहला काम वन रैंक-वन पेंशन लागू करने का होगा। पूर्व सैनिकों की 33 वर्षों से मांग लटकी हुई है।

प्रधानमंत्री ने चुनाव नजदीक आते ही बिहार के लोगों को लुभाने के लिए सवा लाख करोड़ का चुनावी पैकेज दे दिया लेकिन जिन्होंने देश के लिए कुर्बानियां दीं, उनके आश्रितों और पूर्व सैनिकों की मांग अनसुनी क्यों हो रही है। देश की सरहदों की रक्षा करने वालों के लिए अब वित्तीय प्रबंध आड़े क्यों आ रहा है।

केंद्र सरकार की नीयत साफ नहीं है। जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री शायद 9-10 दिन बाद खुद पूर्व सैनिकों से मिलकर बात करने वाले हैं, लेकिन, पूर्व सैनिक अपने स्टैंड पर कायम हैं।

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