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Shimla News: दिल्ली में संसद मार्च के समर्थन में शिमला में प्रदर्शन, नारेबाजी
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केंद्र सरकार खिलाफ जमकर लगाए नारे
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं से खफा हैं छात्र
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की अगुवाई में चल रहे अनशन के समर्थन में सोमवार को शिमला में भी छात्रों और जन संगठनों ने प्रदर्शन किया। सुबह विभिन्न संस्थाओं के युवाओं ने नाज चौक पर प्रदर्शन किया जबकि शाम को एसएफआई के नेतृत्व में रैली निकाली गई।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सोनम वांगचुक के समर्थन में नारे लगाए। सुबह करीब 11:00 बजे नाज चौक पर युवा और छात्र-छात्राएं एकत्र हुए तथा लगभग एक घंटे तक नारेबाजी की। शाम करीब 3:00 बजे उपायुक्त कार्यालय के पास एसएफआई, सीटू, एडवा, डीएसएमएम, एआईएलयू, डीवाईएफआई, शिमला नागरिक सभा, एचकेएस और सेब उत्पादक संघ सहित कई छात्र एवं जन संगठन एकत्र हुए। संगठनों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और दिल्ली में आयोजित संसद मार्च के समर्थन में नारेबाजी की। इसके बाद डीसी कार्यालय से नाज चौक तक रैली निकाली गई, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। उन्होंने बताया कि एसएफआई प्रदेश में शिमला डीसी कार्यालय के बाहर क्रमिक धरना शुरू करेगी।
प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के कमजोर होने के लिए केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने, नई शिक्षा नीति (एनईपी) को वापस लेने तथा सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग शामिल रही। संगठनों का कहना था कि एनटीए, सीयूईटी, यूजीसी-नेट, जेईई और नीट जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन के लिए जिम्मेदार है, लेकिन एजेंसी लगातार अपने दायित्वों के निर्वहन में विफल रही है। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में भूख हड़ताल और धरना दे रहे छात्रों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। एसएफआई की हिमाचल विवि इकाई के सचिव सन्नी सेक्टा ने कहा कि दिल्ली में छात्र परीक्षा घोटालों और शिक्षा के निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि एसएफआई द्वारा दिए संसद मार्च के आह्वान के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की भी निंदा की गई।
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नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं से खफा हैं छात्र
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की अगुवाई में चल रहे अनशन के समर्थन में सोमवार को शिमला में भी छात्रों और जन संगठनों ने प्रदर्शन किया। सुबह विभिन्न संस्थाओं के युवाओं ने नाज चौक पर प्रदर्शन किया जबकि शाम को एसएफआई के नेतृत्व में रैली निकाली गई।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सोनम वांगचुक के समर्थन में नारे लगाए। सुबह करीब 11:00 बजे नाज चौक पर युवा और छात्र-छात्राएं एकत्र हुए तथा लगभग एक घंटे तक नारेबाजी की। शाम करीब 3:00 बजे उपायुक्त कार्यालय के पास एसएफआई, सीटू, एडवा, डीएसएमएम, एआईएलयू, डीवाईएफआई, शिमला नागरिक सभा, एचकेएस और सेब उत्पादक संघ सहित कई छात्र एवं जन संगठन एकत्र हुए। संगठनों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और दिल्ली में आयोजित संसद मार्च के समर्थन में नारेबाजी की। इसके बाद डीसी कार्यालय से नाज चौक तक रैली निकाली गई, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। उन्होंने बताया कि एसएफआई प्रदेश में शिमला डीसी कार्यालय के बाहर क्रमिक धरना शुरू करेगी।
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प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के कमजोर होने के लिए केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने, नई शिक्षा नीति (एनईपी) को वापस लेने तथा सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग शामिल रही। संगठनों का कहना था कि एनटीए, सीयूईटी, यूजीसी-नेट, जेईई और नीट जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन के लिए जिम्मेदार है, लेकिन एजेंसी लगातार अपने दायित्वों के निर्वहन में विफल रही है। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में भूख हड़ताल और धरना दे रहे छात्रों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। एसएफआई की हिमाचल विवि इकाई के सचिव सन्नी सेक्टा ने कहा कि दिल्ली में छात्र परीक्षा घोटालों और शिक्षा के निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि एसएफआई द्वारा दिए संसद मार्च के आह्वान के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की भी निंदा की गई।
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