निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग अध्यक्ष पर बिठाई जांच
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निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के राज्य अध्यक्ष केके कटोच के खिलाफ प्रदेश सरकार ने जांच बिठा दी है। प्रधान सचिव विधि को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। आयोग के अध्यक्ष पर अनियमितताएं बरतने का आरोप है। अपनी कार्यप्रणाली को लेकर बीते कई दिनों से वह प्रदेश सरकार के निशाने पर हैं। आयोग के सदस्य और कर्मचारियों की शिकायत पर इस मामले की सरकार ने बीते माह प्रारंभिक जांच भी करवाई थी। इस जांच के आधार पर अध्यक्ष को मेमोरेंडम जारी कर जवाब भी मांगा था। अब अध्यक्ष के जवाब से असंतुष्टि जताते हुए सरकार ने प्रधान सचिव विधि को मामले की जांच सौंप दी है।
कटोच पर सरकारी पद के दुरुपयोग और स्टाफ से अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। संयुक्त निदेशक प्रारंभिक शिक्षा हितेश आजाद ने मामले की प्रारंभिक जांच की थी। जांच में यह भी सामने आया था कि अध्यक्ष और सदस्य के बीच किसी भी तरह का सामंजस्य नहीं है। इस कारण आयोग का काम प्रभावित हो रहा है। बिना किसी पुख्ता कारणों के निजी संस्थानों में कोर्सिज शुरू और बंद किए जा रहे हैं। निरीक्षण कमेटी की फाइलेें सदस्य को नहीं दिखाई जा रही हैं। जांच रिपोर्ट में अध्यक्ष की ओर से सरकारी गाड़ी के दुरुपयोग की बात भी कही गई है।
जब जांच चल रही थी तो अध्यक्ष ने कुछ कर्मियों को बर्खास्त और डिमोट तक कर दिया। इस पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा को तदर्थ अनुशासनात्मक अधिकारी नियुक्त किया। निदेशक ने सभी कर्मियों को बहाल करने के आदेश दिए। इसके बाद अध्यक्ष ने सचिव और वित्त अधिकारी से वित्तीय शक्तियां छीनकर अपने पास रख लीं। बीते दिनों ही अध्यक्ष ने एक और विवादित फैसला लेते हुए बिना आयोग की बैठक किए निजी संस्थानों की जांच करने के लिए खुद और सदस्य के बीच प्रदेश के छह-छह जिले बांट लिए। कटोच की पूर्व सरकार के समय जून 2017 में तीन साल के लिए नियुक्ति हुई है।