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वृद्ध आश्रम न बनने पर सामाजिक न्याय विभाग के प्रधान सचिव तलब

Fri, 29 Nov 2019 11:06 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 29 Nov 2019 11:06 AM IST
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Principal Secretary Social Justice Summoned for not building an old ashram
फाइल फोटो

हिमाचल के हर जिले में वृद्ध आश्रम न बनाने के मामले में हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव सामाजिक न्याय और अधिकारिता को पांच दिसंबर को तलब किया है। राज्य के अधिकारियों के दृष्टिकोण पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ कि खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के एक संवेदनशील मुद्दे पर राज्य सरकार के अधिकारिओं को लचर कार्यप्रणाली नहीं अपनानी चाहिए। 

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खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि वे शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि हिमाचल प्रदेश में तकरीबन  कितने वृद्ध हैं, जिन्हें वृद्ध आश्रम की जरूरत है। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में वृद्ध आश्रम बनाए जाने के लिए राज्य सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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अदालत को बताया गया कि संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (भारत) की ओर से जारी आंकड़ों और वर्ष 2011 की जनगणना के  अनुसार हिमाचल प्रदेश उच्चतम वरिष्ठ नागरिक कि श्रेणी में देश का चौथा राज्य है। अदालत को बताया गया कि हिमाचल प्रदेश में सात लाख व्यक्तियों की जनसंख्या, जिनकी आयु 60 वर्ष और उससे अधिक है। जो राज्य की कुल जनसंख्या का 10.2 फीसदी है और राष्ट्रीय औसत 8.6 फीसदी से अधिक है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाईं है कि राज्य सरकार को आदेश दिए जाएं कि प्रदेश में वृद्धाश्रम, डे केयर सेंटर, हेल्प लाइन की व्यवस्था की जाए।

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