{"_id":"cce55bfbab42bf921cc1c0417c807ba0","slug":"president-dissent-property-attachment-and-confiscationthe-bill-of-himachal-pradesh","type":"story","status":"publish","title_hn":"राष्ट्रपति ने लौटाया प्रॉपर्टी जब्त करने का विधेयक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राष्ट्रपति ने लौटाया प्रॉपर्टी जब्त करने का विधेयक
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 04 Jul 2014 01:19 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई के लिए हिमाचल विधानसभा से पारित कर राष्ट्रपति की मंजूरी को भेजा गया विधेयक केंद्र सरकार ने आपत्तियों के साथ लौटा दिया है। पूर्व भाजपा सरकार ने 30 अगस्त, 2011 को सदन में विशेष न्यायालय (प्रॉपर्टी अटैचमेंट एंड कान्फिस्केशन) विधेयक 2011 पारित करवाया था।
विज्ञापन
इसमें प्रावधान था कि पब्लिक सर्वेंट्स के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच को राज्य में विशेष न्यायालय बनेंगे। ये एक साल में हर केस में फैसला देंगे और भ्रष्टाचार से जुटाई गई संपत्ति को केस से पहले अटैच किया जाएगा। बाद में इसे जब्त भी किया जा सकेगा।
विज्ञापन
भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन के एकदम बाद राज्य की भाजपा सरकार ने ये बड़ा कदम उठाया था। इस पर गृह मंत्रालय ने कुछ आपत्तियां जताई हैं। कहा गया है कि इसके प्रावधान मनी लांड्रिंग एक्ट 2002 की धारा 71 से टकरा रहे हैं।
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने राज्य को सलाह दी है कि यदि इसे संशोधित करना हो तो उस समय गृह मंत्रालय के सुझावों को भी इसमें शामिल किया जाए। कुछ सुझाव अलग से दिए गए हैं। हालांकि, राज्य की कांग्रेस सरकार अब इस विधेयक को संशोधित करेगी या वापस लेगी, ये अभी तय नहीं है?
विधेयक की कमियां दूर करे सरकार : धूमल
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार से संपत्ति जुटाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को ये कदम उठाया था। यदि केंद्रीय कानून से राज्य का कानून टकरा रहा हो तो राज्य को ही इसे बदलना होता है। जो कमियां केंद्र सरकार ने बताई हैं उन्हें वर्तमान सरकार दूर करे और विधेयक को क्लीयर करवाए।