हमीरपुर: उपचुनाव में प्रेम कुमार धूमल की अनदेखी भी रही हार का कारण
मंडी लोकसभा सीट समेत सोलन के अर्की, शिमला के जुब्बल-कोटखाई और कांगड़ा के फतेहपुर सहित चारों सीटों में भाजपा के चुनाव प्रचार में धूमल ने बिल्कुल भी भाग नहीं लिया। धूमल की अनुपस्थिति पार्टी कार्यकर्ताओं को खली। वहीं धूमल फैक्टर को हाशिये पर धकेलने के तथाकथित प्रयासों से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच एक गलत संदेश भी गया।
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हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र सहित प्रदेश के तीन अन्य विस क्षेत्रों में भाजपा को मिली करारी हार के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार धूमल के नाम पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। बेशक प्रदेश भाजपा हार के कारणों को तलाशने और 2022 के चुनाव से पूर्व इन कमियों को दूर करने की बातें कर रही है। लेकिन भाजपा की इस शर्मनाक हार के पीछे दो बार मुख्यमंत्री रहे प्रेम कुमार धूमल की अनदेखी को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। मंडी लोकसभा सीट समेत सोलन के अर्की, शिमला के जुब्बल-कोटखाई और कांगड़ा के फतेहपुर सहित चारों सीटों में भाजपा के चुनाव प्रचार में धूमल ने बिल्कुल भी भाग नहीं लिया। धूमल की अनुपस्थिति पार्टी कार्यकर्ताओं को खली। वहीं धूमल फैक्टर को हाशिये पर धकेलने के तथाकथित प्रयासों से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच एक गलत संदेश भी गया।
पार्टी में गुटबाजी और सरकार में काम न होने के आरोप आए दिन कई कार्यकर्ता लगाते रहे। 2017 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा गया। जिसकी बदौलत प्रदेश में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा सत्ता की दहलीज तक पहुंची। धूमल की जहां पार्टी के शीर्ष नेताओं से लेकर आम कार्यकर्ताओं में एक मजबूत पकड़ है। तो वहीं अफसरशाही पर भी धूमल सरकार में पूरा तरह नियंत्रण रहा है। ऊपरी हिमाचल समेत सेब बेल्ट में धूमल की मजबूत पकड़ किसी से छिपी नहीं है। पूर्व के चुनाव में जुब्बल-कोटखाई से स्वर्गीय नरेंद्र बरागटा की जीत एक स्पष्ट उदाहरण है। इन उपचुनाव में मिली हार से जहां वर्तमान प्रदेश सरकार को सबक मिला है। वहीं हाईकमान को भी एक बार फिर से सोचने पर मजबूर किया है।