सीबीआई जांच पर प्रतिभा सिंह ने उठाए कई सवाल, दिए ये तर्क
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आरंभिक जांच के बाद यदि कोई साक्ष्य नहीं मिलता और जांच बंद कर दी जाती है तो उसी मामले में पुन: जांच कर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने हाईकोर्ट के समक्ष उक्त तर्क रखते हुए सीबीआई की जांच पर कई सवाल उठाए।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी के समक्ष प्रतिभा सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने कहा कि सीबीआई इस मामले में लगातार जांच प्रक्रिया का उल्लंघन कर रही है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सीबीआई ने 19 अक्तूबर, 2012 को मामले में आरंभिक जांच शुरू की।
फिर इस तर्क पर जांच बंद कर दी कि उनकी मुवक्किलों ने कुछ भी गलत नहीं किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद सीबीआई ने उसी मामले में पेश दस्तावेजों के आधार पर फिर से जांच शुरू कर प्राथमिकी दर्ज कर ली। ऐसा नहीं किया जा सकता। तय कानून है कि आरंभिक जांच तीन माह में पूरी की जानी चाहिए, लेकिन तीन वर्ष से मामले को लंबित रखा गया है।
पहले बंद कर दी थी जांच
कॉमन काज संस्था व सीबीआई की जांच पर अदालत का हर फैसला प्रतिभा सिंह के हक में आया है और वह संरक्षण पाने की हकदार है।जांच सीआरपीसी के प्रावधानों पर होती है और सीबीआई ने तय प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
आयकर विभाग ने भी उनकी मुवक्किल की ओर से भरे रिटर्न को स्वीकार किया है और बाद में उसी को आधार बनाकर फर्जी मामला बना दिया गया। जांच एजेंसी को यह स्पष्ट करना होगा कि उसे क्या नये साक्ष्य मिले हैं, जबकि जांच एजेंसी ने पहले जांच बंद करने का कारण भी बताया था। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी का कोई आधार ही नहीं है।