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प्रतिभा: भारत को आत्मनिर्भर ड्रोन देने की ओर बढ़े कांगड़ा के प्रभात के कदम

Tue, 07 Sep 2021 11:50 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 07 Sep 2021 11:50 AM IST
सार

आत्मनिर्भरता के इस प्रयास में कांगड़ा जिले में धर्मशाला के नजदीक घरोह के रहने वाले प्रभात ठाकुर बेहद करीब पहुंच चुके हैं।  इस प्रतियोगिता की शुरुआत में 6000 कंपनियों ने हिस्सा लिया था और उनको पीछे छोड़ते हुए हिमाचल के प्रभात ने टॉप 30 में जगह बना ली है। 

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Prabhat thakur of kangra himachal steps towards providing self-reliant drones to India
प्रभात ठाकुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत सरकार ड्रोन तकनीकी के क्षेत्र में लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की स्वदेशी माइक्रो प्रोसेसर चैलेंज प्रतियोगिता करवा रहा है। इस प्रतियोगिता का मकसद ऐसी प्रतिभा का खोज करना है, जो कि ड्रोन तकनीकी में विदेशों पर निर्भरता कम करके स्वदेशी, सुरक्षित और सस्ता ड्रोन निर्मित कर सके। आत्मनिर्भरता के इस प्रयास में कांगड़ा जिले में धर्मशाला के नजदीक घरोह के रहने वाले प्रभात ठाकुर बेहद करीब पहुंच चुके हैं।

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 इस प्रतियोगिता की शुरुआत में 6000 कंपनियों ने हिस्सा लिया था और उनको पीछे छोड़ते हुए हिमाचल के प्रभात ने टॉप 30 में जगह बना ली है। तकनीकी क्षेत्र में इतना लंबा सफर तय कर प्रभात ने पूरे हिमाचल को गौरवान्वित किया है। इसके लिए भारत सरकार की ओर से उन्हें चार लाख रुपये बतौर इनाम दिए गए हैं। अब उनका लक्ष्य टॉप टेन में जगह बनाकर उनका लक्ष्य भारत को स्वेदशी और आत्मनिर्भर ड्रोन देने का है। इसके लिए अंतिम चरण में तीन महीनों में अगले चरण का मुकाबला होगा। 
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भारत की विदेशों पर निर्भरता कम करना उद्देश्य: प्रभात
प्रभात ठाकुर ने बताया कि अब तक भारत विदेशों में बने ड्रोन पर ही निर्भर रहा है। इससे देश की गोपनीयता को हमेशा खतरा रहा है। केंद्र सरकार, आईआईटी मद्रास के द्वारा निर्मित ‘शक्ति’ सॉफ्टवेयर पर ओपन सोर्स पर आधारित ड्रोन बनाने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि काफी समय से इस क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देख रहे हैं। 
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बिना रिमोट से चलने वाला पहला स्वदेशी ड्रोन बना चुके हैं प्रभात
प्रभात ठाकुर बिना रिमोट के चलने वाला पहला स्वदेशी ड्रोन बना चुके हैं। यह ड्रोन गूगल मैप की मदद से स्थान का पता लगाकर वहां दवाइयां या जरूरी सामान पहुंचा सकेगा। प्रभात ठाकुर ने 100 फीसदी ऑटोमेटिक फीचर वाला स्वदेशी ड्रोन तैयार किया है। यह ड्रोन पहाड़ी राज्यों के दुर्गम क्षेत्रों में मददगार होगा। अगर बीच रास्ते में ड्रोन की बैटरी खत्म होने लगेगी या फिर सिगनल टूट जाने का खतरा होगा तो यह जहां से उड़ान भरी थी, वहां खुद सुरक्षित वापस आ जाएगा।

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