1000 रुपये गिरे आलू के दाम, किसानों को लाखों की चपत
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आलू की फसल की पटाई अभी तक पूरी तरह से शुरू भी नहीं हो पाई है और बाजार में आलू की नई फसल का मूल्य मात्र चार दिनों में ही 1000 रुपये प्रति क्विंटल गिर गया है। जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होगा। जिला में कई ऐसे किसान हैं, जिन्होंने कामगार न मिलने के कारण अभी तक आलू की फसल नहीं निकाली है।
हालांकि कुछ किसानों द्वारा जालंधर, होशियारपुर सहित यूपी-बिहार से कामगारों को आलू की पटाई के लिए बुलाया जा रहा है। वहीं, कुछ किसान जालंधर व होशियारपुर से खुद ही गाड़ी आदि का इंतजाम कर कामगारों को आलू की पटाई के लिए ला रहे हैं। इसके साथ इनका खाने-पीने व रहने का भी इंतजाम किसानों को ही करना पड़ रहा है। आलू की फसल के मूल्य 1000 रुपये कम होकर बाजार में 3300 रुपये से सीधे 2300 रुपये हो गए हैं।
जिन किसानों ने सैकड़ों कनाल भूमि में आलू की फसल लगाई है, उन्हें सीधे तौर पर ही कई लाख रुपये की चपत लग गई है। जिला के प्रगतिशील आलू उत्पादन करने वाले किसान जगतार सिंह, पवन सैणी, शशि कुमार, दरबारा सिंह तथा प्रकाश चंद ने बताया कि आलू के दाम गिरने से उन्हें लाखों की क्षति होगी। इसकी वजह से किसान चिंतित हैं।
50 प्रतिशत तबाह हो चुकी है फसल
जिला ऊना में मौसम की मार से आलू की 50 प्रतिशत फसल पहले ही तबाह हो चुकी है। इसके साथ कई किसानों के खेत भी अत्यधिक पानी के कारण बह गए थे। जिससे किसानों को दोबारा से खेत तैयार कर आलू की फसल की बिजाई करनी पड़ी थी। इस मौसम की मार के कारण हर तीसरे छोटे किसान को कम से कम 5 से 20 हजार रुपये और बड़े किसानों को 4 से 8 लाख रुपये तक की क्षति हुई थी।
समय पर निकाले आलू की फसल- कृषि उपनिदेशक सुरेश कपूर ने बताया कि कोई भी किसान आलू की फसल के कम होते मूल्यों के कारण समय से पहले आलू की फसल की पटाई न करें। क्योंकि आलू की फसल का निर्धारित समय दो माह है। अगर किसान दो माह से पहले आलू की फसल की पटाई करते हैं तो किसानों को आलू की फसल की उचित पैदावार नहीं मिल पाएगी।