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Pong Dam Displaced: सरकार के खिलाफ कोर्ट में आरपार की लड़ाई लड़ेंगे पौंग बांध विस्थापित
Wed, 27 Jul 2022 11:18 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, राजा का तालाब (कांगड़ा)
संवाद न्यूज एजेंसी, राजा का तालाब (कांगड़ा)
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 27 Jul 2022 11:18 PM IST
सार
पौंग बांध विस्थापित समिति ने सरकार के खिलाफ अब कोर्ट में आरपार की लड़ाई लड़ने की तैयारी कर ली है। राजा का तालाब में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के साथ बैठक की गई।
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आरपार की लड़ाई लड़ेंगे पौंग बांध विस्थापित।
- फोटो : संवाद
विस्तार
हिमाचल प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति ने सरकार के खिलाफ अब कोर्ट में आरपार की लड़ाई लड़ने की तैयारी कर ली है। राजा का तालाब में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के साथ बैठक की गई। इस दौरान पौंग बांध विस्थापितों ने 50 साल से अधिक समय तक सरकार से गुहार लगाने के बावजूद राजस्थान में समझौते के अनुरूप भूमि आवंटन न किए जाने पर केस दायर करने के लिए अपने दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को सौंप दिए हैं।
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प्रदेश पौंग बांध समिति के प्रधान हंसराज चौधरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हुकम चंद गुलेरी ने बताया कि विस्थापन की पीड़ा का दंश झेलते हुए 50 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। केंद्र, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने विस्थापितों की पीड़ा को समझने की कोशिश नहीं की है। राजनीतिक दलों ने लगातार भोले-भाले विस्थापितों की भावनाओं से खेलकर उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि जब सरकार को बिजली उत्पादन की जरूरत थी या राजस्थान को हराभरा बनाने के लिए विशाल जलाशय की जरूरत थी, तो हल्दून घाटी की बेहद उपजाऊ भूमि को जलमग्न करके उन्हें भटकने के लिए छोड़ दिया।
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समिति ने बताया कि अतीत में पौंग बांध बनाने को लेकर समझौता राजस्थान में प्रथम चरण में आरक्षित 2.20 लाख एकड़ भूमि देने के लिए हुआ था तो फिर क्यों समझौते को दरकिनार करके द्वितीय चरण में भूमि आवंटित की जा रही है। समिति का कहना है कि सरकारों से बार-बार समझौते के अनुसार भूमि आवंटन करने का आग्रह किया। गंगानगर में भूमि की उपलब्धता न होने पर मुआवजे को लेकर भी कहा गया, तो सरकारें इस बारे क्यों नहीं कोई निर्णय ले पा रही हैं। उन्होंने कहा कि पावर कमेटी की 27 बैठकें हो चुकी हैं और सब बेनतीजा रहीं। समिति ने कहा कि पौंग बांध विस्थापित अब आरपार की लड़ाई लड़ने का मन बना चुके हैं।
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