एम्स पर भिड़ पड़े हिमाचल के ये दो मंत्री
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ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) की हिमाचल में स्थापना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सूबे के दो कैबिनेट मंत्री आपस में भिड़ गए हैं।
जहां प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मंडी के नेरचौक स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) मेडिकल कॉलेज को एम्स का दर्जा देने की सिफारिश कर रहे हैं।
वहीं खाद्य एवं परिवहन मंत्री एम्स के लिए टांडा मेडिकल कालेज को सबसे उपयुक्त बता रहे हैं। शिमला की पेयजल योजना के बाद यह दूसरा मौका है, जब सरकार के मंत्रियों के बीच खुलकर मतभेद सामने आया है।
प्रेस कांफ्रेंस में खुलकर आए सामने
बुधवार को सचिवालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ही कैबिनेट मंत्री जीएस बाली ने टांडा मेडिकल कॉलेज को एम्स बनाने पर बल दिया। ठीक उसी समय सचिवालय में मीडिया से बातचीत करते स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने एम्स के लिए मंडी के नेरचौक स्थित नवनिर्मित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज को एम्स बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इसे लेकर केंद्र सरकार से आग्रह भी किया जा चुका है, जबकि स्वास्थ्य मंत्री के अमेरिका प्रवास के दौरान ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र भेज दिया है कि टांडा मेडिकल कॉलेज को ही एम्स बनाया जाए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की ओर से मुख्यमंत्री को एम्स के लिए लिखे गए पत्र के जवाब में हिमाचल ने टांडा मेडिकल कॉलेज को एम्स बनाने का प्रस्ताव भेजा था।
कौल सिंह बोले, ईएसआई को अप्रगेड किया जाए
राज्य के मंडी जिले में बने ईएसआई अस्पताल को एम्स स्तर का बनाने का आग्रह केंद्र सरकार से किया है। इसके लिए जितनी भी जमीन की जरूरत होगी, राज्य सरकार की ओर से मुहैया करवाई जाएगी।
- कौल सिंह ठाकुर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हिमाचल
कांगड़ा के टांडा मेडिकल कालेज को ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट (एम्स) में बदला जाना चाहिए। यहां पर पर्याप्त संसाधन है। आवश्यकता के अनुसार भूमि सरकार उपलब्ध करवाएगी।
जीएस बाली, खाद्य एवं परिवहन मंत्री हिमाचल