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ये कैसी पॉलिसी, गमले में एक नींबू और जौ उगाने वाला भी किसान

Wed, 01 Aug 2018 02:19 PM IST
राकेश भारद्वाज, अमर उजाला, धर्मशाला
राकेश भारद्वाज, अमर उजाला, धर्मशाला Updated Wed, 01 Aug 2018 02:19 PM IST
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Policy for farmers horticulture in himachal pradesh

प्रदेश में किसान और बागवान के नाम पर सबका बेड़ा पार हो रहा है, क्योंकि हिमाचल सरकार नहीं जानती है कि किसान और बागवान होते क्या हैं। हिमाचल में गमले में नींबू का पौधा उगाने वाला भी बागवान है तो घर की क्यारियों में जौ की फसल उगाने वालों को सरकार किसान मानती है।

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हिमाचल को बने पांच दशक हो गए हैं, लेकिन सरकार अभी तक किसानों और बागवानों के लिए कोई विशेष परिभाषा ही नहीं बना पाई है। हालांकि, किसानों और बागवानों को छोटे और बड़े किसान की संज्ञा दी गई है, लेकिन ऐसा कोई विशेष पैमाना नहीं निर्धारित किया गया है कि किसे किसान और बागवान की श्रेणी में डाला जाए और किसे नहीं।

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किसान-बागवानों की अलग-अलग समस्याएं

Policy for farmers horticulture in himachal pradesh

प्रदेश में किसान-बागवान एक ही श्रेणी में आते हैं, जबकि इन दोनों की समस्याएं भी अलग हैं और इसके समाधान भी। ऐसे में किसान और बागवानों की श्रेणी और परिभाषा की समय-समय पर मांग उठती रही है।

बागवानी को रखा है 100 करोड़ का बजट
प्रदेश में इस बजट में 100 करोड़ का प्रावधान बागवानी के लिए किया गया है। इसमें किसानों के नाम का जिक्र नहीं है। किसानों की 2022 तक आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न योजनाएं बनाई गई हैं।

प्रदेश में किसानों और बागवानों की छोटे और बड़े किसान-बागवान की श्रेणी बनाई गई है। इसके अलावा किसान और बागवान के लिए अन्य कोई परिभाषा की आवश्यकता नहीं है। इसी के आधार पर किसान-बागवानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाता है। - राम लाल मारकंडा, कृषि एवं बागवानी मंत्री

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