पीएम मोदी ने हिमाचली किसानों से की सीधी बात, पूछे दो बड़े सवाल
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बंदरों की समस्या से हिमाचल के किसान ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चिंतित हैं। सीएसआईआर के 75वें स्थापना दिवस पर दिल्ली से प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सूबे के दो प्रगतिशील किसानों से सीधी बात की।
आईएचबीटी पालमपुर में जुटे प्रदेश भर के किसानों में एक शिशु पटियाल से पीएम का पहला सवाल था कि आपके क्षेत्र में बंदरों की समस्या तो नहीं? इस पर शिशु पटियाल ने बताया कि हम फूलों की खेती करते हैं।
पॉली हाउस बनाए हैं। अब बंदरों की समस्या हमारे यहां नहीं है। क्योंकि अन्य फसलों की तरह फूलों को बंदर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। फूलों में बीमारियों की समस्या तो है पर इसके लिए हम छिड़काव करते हैं।
इस पर मोदी ने पलटकर पूछा कि क्या छिड़काव नुकसानदेह नहीं होता? तो शिशु पटियाल ने बताया कि हम वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही सुरक्षित छिड़काव करते हैं।
लाहौल के किसान से पूछा ये सवाल
मोदी का दूसरा सवाल जनजातीय जिले लाहौल स्पीति के किसान रणवीर सिंह नेगी के लिए था। प्रधानमंत्री ने पूछा कि लाहौल में पारंपरिक खेती के अलावा आप और कौन सी फसलें उगाते हैं।
नेगी ने कहा कि हम परंपरागत मटर और आलू की फसल के अलावा अब लिलियम कट फ्लावर खेती की ओर मुड़ रहे हैं। आईएचबीटी पालमपुर के सहयोग से लाहौल में 150 किसानों की एक सहकारी सभा बनी है। दिल्ली तक हम फूल बेच रहे हैं जो किसानों की आर्थिकी को सुदृढ़ बना रहे हैं।
हिमाचल में विकसित फूलों की दो किस्मों का विमोचन
सीएसआईआर निदेशक डा. संजय कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर की ओर से विकसित की गई फूलों की दो किस्मों कैला लिलि और जरबेरा का विमोचन किया।
ये हैं मोदी से बात करने वाले किसान
शिशु पटियाल : कांगड़ा
फूलों के शौकीन शिशु पटियाल ने वर्ष 2008 में सीएसआईआर पालमपुर में फूलों की खेती की ट्रेनिंग ली। इसके बाद उन्होंने कांगड़ा के कंडवाड़ी में फूल उगाने शुरू किए। अब 6 हजार स्क्वेयर फीट भूमि में फूलों की खेती कर रहे हैं। इससे पटियाल सालाना चार लाख रुपये कमाते हैं। वे फूलों को पालमपुर और दिल्ली में बेचते हैं।
रणवीर सिंह नेगी : लाहौल स्पीति
जनजातीय जिले लाहौल के रणवीर सिंह नेगी ने वर्ष 2008 में सीएसआईआर पालमपुर में फूलों की खेती की ट्रेनिंग ली। नेगी ने 150 किसानों की एक सोसाइटी बनाई जो तीन समूहों में फूलों की खेती कर रहे हैं। तीनों समूहों की सालाना आय तीन करोड़ रुपये है। वे दिल्ली की गाजीपुर फूल मंडी में फसल बेचते हैं। रणवीर अब लिलियम किस्म के फूल का बीज विकसित करने पर काम कर रहे हैं।