पूर्व सीएम धूमल बोले, दो राजधानियों की घोषणा सबसे बड़ा मजाक
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पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि कर्मचारियों को वेतन-भत्ते देने के लिए कर्ज लेने वाली सरकार की दो राजधानियों की घोषणा सबसे बड़ा मजाक बन गई है। धूमल ने मुख्यमंत्री वीरवभद्र सिंह की धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने घोषणा पर कहा कि इस फैसले का चौतरफा विरोध हो रहा है।
सरकार के ही मंत्रियों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने इस घोषणा को तर्कसंगत नहीं माना है। पत्रकार वार्ता में धूमल ने कहा कि यह घोषणाओं की सरकार की एक और खोखली घोषणा है। कहा कि सबको पता है कि दो दिन पहले सरकार की कर्मचारियों और पेंशनरों को वेतन-भत्ते देने के लिए 1000 करोड़ कर्ज लेने की खबरें सामने आई थीं। जो सरकार वेतन-भत्ते देने में असमर्थ है, उसका प्रदेश में दो राजधानियों की बात करना सबसे बड़ा मजाक है।
कहा कि आज सारा देश भाजपा को शक्तिशाली मान रहा है। राम मनोहर लोहिया का नाम लेकर राजनीति को आगे बढ़ाने वाली सपा आज लोहिया के कांग्रेस को उखाड़ फेंकने वाले सपने को भुलाकर कांग्रेस से गठबंधन कर रही है। आज प्रदेश में हर वर्ग को इस सरकार ने सत्ता में आने के बाद अपमानित किया है।
अब डॉक्टरों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। डॉक्टरों को मजबूर किया जा रहा है कि वो आंदोलन करें। कहा कि भाजपा की चार्जशीट पर अब बूथ स्तर पर चर्चा होगी। कार्यकर्ताओं को चार्जशीट के मुख्य बिंदु दिए जाएंगे और स्थानीय मुद्दों पर भी जनता के साथ चर्चा होगी। इस दौरान प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती भी मौजूद रहे।
धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने की घोषणा राजनीति से प्रेरित
धर्मशाला को राज्य की दूसरी राजधानी बनाने के फैसले को हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की राजनीति से प्रेरित कोरी घोषणा करार दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के अलावा अब सरकार के मंत्री को भी यह बात रास नहीं आ रही है।
कहा कि मुख्यमंत्री से एक राजधानी शिमला संभाली नहीं जा रही और अब वे दूसरी राजधानी बनाने के धर्मशाला और कांगड़ा के लोगों सब्जबाग दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल राजधानी में पीलिया ने कहर बरपाया और साल के आखिर में रही सही कसर बर्फ बारी ने पूरी कर दी। सरकार के सारे दावों की पोल खोल के रख दी।
इतनी मुश्किल परिस्थिति के बावजूद मुख्यमंत्री और उनका परिवार अपनी आय से अधिक केस के बचाव के लिए दिल्ली पहुंच गए। एक खास 6 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाया गया था, ताकि वे हेलीकॉप्टर तक पहुंच सकें। मुख्यमंत्री के विजन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रिजर्व बैंक से और कर्जा लिया जा रहा है। प्रदेश पहले से ही 36000 करोड़ रुपये ऋण में डूबा है।