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Shimla News: कालिया नाग के फनों पर श्रीकृष्ण नृत्य का मंचन देख लोग हुए भावुक
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राधा-कृष्ण मंदिर में वृंदावन के कलाकारों ने प्रस्तुत की रासलीला
जीवंत किया कालिया नागनाथन लीला का प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित रासलीला के दूसरे दिन शनिवार को कलाकारों ने कालिया नागनाथन लीला का मंचन किया।
इस दौरान ब्रजकला आदर्श रामकृष्ण लीला संस्थान वृंदावन के कलाकारों ने वृंदावन की पावन यमुना में कालिया नाग के वास और उसके विष से दूषित होते जल की कथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस दौरान बाल गोपाल श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ यमुना तट पर पहुंचे और ब्रजवासियों को भयमुक्त करने का संकल्प लिया। लीला के दौरान दिखाया कि भगवान श्रीकृष्ण यमुना में कूद पड़े और कालिया नाग के फनों पर चढ़कर नृत्य करने लगे। श्रीकृष्ण के चरणों के प्रभाव से कालिया नाग का अहंकार चूर हो गया और उसने भगवान से क्षमा मांगी। भगवान श्रीकृष्ण ने उसे अभयदान देते हुए यमुना छोड़कर अन्य स्थान पर जाने का आदेश दिया। लीला के माध्यम से कलाकारों ने संदेश दिया कि यह केवल भगवान श्रीकृष्ण की कालिया नाग पर विजय नहीं, बल्कि अहंकार पर भक्ति की विजय थी। उन्होंने बताया कि जहां श्रीकृष्ण के चरण पड़ते हैं, वहां विष भी अमृत में बदल जाता है और भय भक्ति में परिवर्तित हो जाता है। सनातन धर्म सभा के प्रचार मंत्री सुमन पाल दत्ता ने बताया कि रासलीला का आयोजन 27 अगस्त तक रोजाना शाम 4:30 बजे से 7 बजे तक किया जाएगा। इस अवसर पर सभा के प्रधान अजय सूद, महासचिव धर्मपाल पुरी सहित सभा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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जीवंत किया कालिया नागनाथन लीला का प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित रासलीला के दूसरे दिन शनिवार को कलाकारों ने कालिया नागनाथन लीला का मंचन किया।
इस दौरान ब्रजकला आदर्श रामकृष्ण लीला संस्थान वृंदावन के कलाकारों ने वृंदावन की पावन यमुना में कालिया नाग के वास और उसके विष से दूषित होते जल की कथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस दौरान बाल गोपाल श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ यमुना तट पर पहुंचे और ब्रजवासियों को भयमुक्त करने का संकल्प लिया। लीला के दौरान दिखाया कि भगवान श्रीकृष्ण यमुना में कूद पड़े और कालिया नाग के फनों पर चढ़कर नृत्य करने लगे। श्रीकृष्ण के चरणों के प्रभाव से कालिया नाग का अहंकार चूर हो गया और उसने भगवान से क्षमा मांगी। भगवान श्रीकृष्ण ने उसे अभयदान देते हुए यमुना छोड़कर अन्य स्थान पर जाने का आदेश दिया। लीला के माध्यम से कलाकारों ने संदेश दिया कि यह केवल भगवान श्रीकृष्ण की कालिया नाग पर विजय नहीं, बल्कि अहंकार पर भक्ति की विजय थी। उन्होंने बताया कि जहां श्रीकृष्ण के चरण पड़ते हैं, वहां विष भी अमृत में बदल जाता है और भय भक्ति में परिवर्तित हो जाता है। सनातन धर्म सभा के प्रचार मंत्री सुमन पाल दत्ता ने बताया कि रासलीला का आयोजन 27 अगस्त तक रोजाना शाम 4:30 बजे से 7 बजे तक किया जाएगा। इस अवसर पर सभा के प्रधान अजय सूद, महासचिव धर्मपाल पुरी सहित सभा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।