{"_id":"608128cd8ebc3e592e0eb747","slug":"people-immersed-mortal-remains-in-kheerganga-kangra-himachal-pradesh-in-between-corona-crisis","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार नहीं, खीर गंगा जा रहे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार नहीं, खीर गंगा जा रहे लोग
Thu, 22 Apr 2021 01:13 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, बैजनाथ (कांगड़ा)
अमर उजाला नेटवर्क, बैजनाथ (कांगड़ा)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 22 Apr 2021 01:13 PM IST
विज्ञापन
खीर गंगा घाट
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना के दौर ने एक बार फिर से ऐतिहासिक शिव मंदिर के नीचे विनबा खड्ड के किनारे पर स्थित खीर गंगा घाट के महत्व को बढ़ा दिया है। अपने स्वर्गीय परिजनों के अस्थि विसर्जन को लेकर एक बार फिर से खीर गंगा घाट पर लोगों का बड़ी संख्या में आना जाना शुरू हो गया है और रोजाना चार समीपवर्ती विधानसभा क्षेत्रों और अन्य दूरदराज स्थानों से लोग अस्थि विसर्जन के लिए खीर गंगा घाट में दस्तक दे रहे हैं।
विज्ञापन
इतने वर्षों में किसी भी राजनीतिक, प्रशासन और सामाजिक संगठन ने इस घाट के महत्व को अहमियत नहीं दी है। घाट में सुविधाएं जुटाने और इसकी सुंदरता को निखारने को लेकर आए दिन राजनेता घोषणाएं करते आए हैं, लेकिन वर्तमान में हालात बदतर बने हुए हैं। घाट के चारों तरफ गंदगी है। अस्थियों के विसर्जन के लिए भी स्वच्छ और उपयुक्त स्थान नहीं है। लोग खड्ड में पत्थरों से अस्थियों का विसर्जन कर रहे हैं। मंदिर न्यास का कोई भी कर्मचारी इस घाट पर नजर नहीं आता है।
विज्ञापन
क्या है खीर गंगा घाट का महत्व
मान्यता है कि ऐतिहासिक शिव मंदिर का निर्माण द्वापर युग में पांडवों ने किया था और 88 एडी में इसका जीर्णोद्धार हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खीर गंगा घाट का निर्माण भी मंदिर के साथ हुआ था। मंदिर पुजारी सुरिंद्र आचार्य के अनुसार पांडव जब अपने अज्ञातवास के दौरान मंदिर का निर्माण कर रहे थे, उस समय वे मंदिर के नीचे गंगा घाट का निर्माण करना चाहते थे, लेकिन सूर्य के उदय होने के कारण गंगा घाट का निर्माण नहीं हो सका था। आज भी खीर गंगा घाट के पानी से शिवलिंग के स्नान के बाद ही रोजाना आरती होती है और ब्रिटीश काल में कथोग चश्मे और घाट के पानी को वायसराय के आदेशों पर लाहौर ले जाया जाता था।
विज्ञापन
जिला पर्यटन अधिकारी सुनयना शर्मा ने बताया कि घाट को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए योजना तैयार की गई है और दस्तावेजों को आगे भेजा गया है। बजट स्वीकृत होने के बाद ही कार्य संभव है।