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एंबुलेंस होती तो मासूम की जिंदगी बच जाती
ब्यूरो/अमर उजाला, नालागढ़ (सोलन)
Updated Thu, 27 Nov 2014 01:28 PM IST
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सोलन के नालागढ़ चिकित्सालय से पीजीआई रेफर एक नौ महीने की बच्ची को समय पर एंबुलेंस सेवा न मिलने पर वहीं दम तोड़ दिया। इस घटना से गुस्साए लोगों ने एंबुलेंस के चालक की धुनाई कर दी।
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खेड़ा में रहने वाला प्रवासी कामगार धनंजय 9 माह की बच्ची आशा को दोपहर बाद बीमारी की हालत में नालागढ़ चिकित्सालय लाया, लेकिन चिकित्सकों ने बच्ची की हालत खराब देखकर उसे पीजीआई रेफर कर दिया।
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चिकित्सकों ने साढ़े चार बजे बच्ची को रेफर किया, लेकिन बच्ची के पिता को पीजीआई जाने के लिए एबुंलेंस नहीं मिली। चिकित्सालय में 108 एंबुलेंस के अलावा दो आउट सोर्स एबुलेंस रखी हुई है।
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लोगों का यह भी आरोप था कि जब बच्ची को पीजीआई रेफर किया उस समय 108 एंबुलेंस मौके पर ही थी, लेकिन चालक ने खराबी आने का बहाना बना कर जाने से इंकार कर दिया।
समय पर उपचार न मिलने पर बच्ची ने चिकित्सालय परिसर में ही सायं साढ़े बजे दम तोड़ दिया। मौत के गुस्साए लोगों ने एंबुलेंस के चालक की धुनाई कर दी।
तीनों वाहन मौके पर नहीं थे मौजूद
सीएमओ डा. कुलदीप जसवाल ने बताया कि बच्ची का पहले किसी निजी चिकित्सालय में उपचार चल रहा था। जब उसकी हालत काफी खराब हो गई तब उसे नालागढ़ चिकित्सालय लाया गया।
बच्ची की छाती पूरी तरह से जाम थी इसलिए प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई रेफर कर दिया गया था, लेकिन तीनों वाहन मौके पर मौजूद नहीं थे। इस कारण उसे एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।